रौशनी की चकाचौंध में
रास्ते बहक न जाए
अंधेरों की ओर ..
पाने को उजाला
हमेशा याद रखें
रातें अंधियारी ..
रोशनी को देख
कईयों की आँखें
चौंधियाने लगता ..
होके मदहोश कदम
डगमगा जाता
पड़ता न पग जमीं पर ..
संतुलन के मापदंड
जो बैठा ले मन में..
ऊँचाइयों को देख
कभी उड़े न वो हवा में ..
मन एक चंचल पंछी
जरा सा भी ढील पाकर
ऐंवें ही भटकती फिरती..
हो सामने बड़ा लक्ष्य
तो करनी ही पड़ती
कठिन तपस्या ..
Saturday, 14 October 2017
लक्ष्य
Friday, 13 October 2017
गुजर गए जो लम्हे
बड़ी ही लालसा थी मन में
जाने की उस शहर में ..
जहाँ बचपन से लेकर
अल्हड़ यौवन की
दहलीज पार की
और एकबार फिर
जब वहां जाने का
मिला मौका
तो लगी झूमने खुशी के मारे ..
पहँचते ही लगी मैं ढूंढने
पुराने सारे ठिकाने
जहाँ सहेलियों के
संग करती थी मैं
मटर गस्तियाँ..
अरे ये क्या ?
यहाँ तो सब कुछ बदल गया
लुका छिपी के
सारे अड्डे गायब हो गये
बचपन के अठखेलियों के
सारे गायब देख निशानियाँ
मन भी खट्टा सा हो गया
उस जगह बड़ी बड़ी
इमारतें थी खड़ी..
जिस यादों को संजोकर
निकली थी घर से मैं
मिला न तसल्ली देखकर ..
फिर याद आई
एक सहेली की
जिसके साथ स्कूल
जाती थी मैं रोजाना
देखूँ वो ससुराल में है या
आई हुई है मायका !!
सोचते सोचते उसके
घर मैं पहँच भी गई ..
संयोग से वो मिल भी गई ।
हम बरसों बाद मिल रहे थे !!
हैरानी से एक दूसरे को
देखते ही रह गए ..
खुशी के मारे एक दूसरे के
बाँहों में झूल गए ..
चाय नास्ता के बीच बीच में
बातें भी कर रहे थे ..
बहुत शांत और खुशनुमा माहौल में
हम पुराने दिन को
याद कर हँस रहे थे ..
पर एक ठहराव सा था
माहौल में ..
वो लड़कपन न था
कहकहों में उनमुक्तता न थी
पहले वाली कोई
बात न बची थी बाकी ..
बहुत गंभीर वो दिखने लगी थी ।
उसके चेहरे पे हरदम मुस्कान
पहले रहता था बिखरा ..
मै कभी नाराज भी रहती
तो भी वो मुस्कुराती रहती
मैंने एक दिन कहा झल्ला कर ..
मैं हूँ दुखी तू हँस रही
उसने कहा क्या करूँ
शक्ल ही ऐसी है !!
रोनी सूरत दिखती
न किसी को !!
पर वो अब वैसी न थी
जो उसमें मैं खोज रही थी ..
शायद लम्हे जो बीत जाते
वो फिर ढूंढने से भी नहीं मिलता
मिलता न कोई
उसकी निशानियाँ ..
Thursday, 12 October 2017
अनोखा बंधन
देखा है मैंने कई ऐसे
मिंया बीबी, हर हमेशा
लड़ते झगड़ते आपस में ..
बिन बात के ही उलझते
पर गुस्सा खत्म हो जाता
कुछ ही देर में ..
कितने ही रूठने मनाने का
चलता है सिलसिला ..
पर दोनों को ये पता इस जग में सिर्फ
वही है अपना कहलाने वाला..
मिंया बीबी एक दूजे पर आश्रित होते
खुश रहते एक दूसरे के बंधन में ..
अनोखा बंधन सा होता उनके बीच में ..
वो जो अकेले रह गए अब !
तड़पते रहते दिन रात
एक दूसरे के याद में ..
घर में भरा पूरा परिवार है
सब कुछ तो छोड़ गए
एक तिनका भी नहीं ले गए ..
फिर क्यों कर वो तड़प रहे ..
जिस बच्चों को पालने में
दुनियाँ जहान को बिसरा कर
अपने को अलग थलग करा
आज वही बच्चे क्यों न
मन के खालिपन भरता ..
क्यों आँखें तलाश रही उनकी निंशानियां
हर वक्त राहों में भरने वाले रोशनी
की कमी महसूस होता उनके दिल में ..
ठोकरों से बचाने वाला और
संभालने वाले हथेलियों को
क्यों याद करते वो हरदम ..
शायद मन को कोई न टटोलता !!
बिना कुछ कहे ही एक दूजे के
मन के हर भाव समझ जाते
एक दूसरे का हर दर्द जान लेते ..
अनकही पैगाम भी पहँचता उन तक
यही है रिश्ता मियाँ बीबी का
Wednesday, 11 October 2017
विश्व बालिका दिवस
विश्व पटल पर बालिकाओं ने
दिखा दिया वो काम ..
लहराया है ज्ञान और बुद्धियों से
उपलब्धियों का परचम ..
जब भी मौका मिला खुद को
साबित किया ..
असंभव को भी संभव कर दिखाया..
चाँद पर भी पहँचकर सबको
चौंका दिया ..
बचा न कोई क्षेत्र जहाँ उपस्थित
न हो बालिकाएँ
डाॅ ,इन्जिनियर और वैज्ञानिक
से लेकर सेना के पद संभाल
रही है बालिकाएँ ..
हर विधा में अपने हुनर से सबको
रूबरू करवा दिया ..
विश्व में भी बालिकाओं ने खुद के लिए
ताली बजवाया..
बालिकाओं को मान सम्मान देना
है सर्वोपरी ..
उसके बिना ना चल सकता परिवार,
होती हर घर की वो धूरी ..
कुछ मनचले आते न बाज अपने
हरकतों से ..
इज्जत को तार तार करने को निःसहाय
जान मौके के रहते तलाश में ..
करो न बालिकाओं का अपमान
संभल जाओ शैतानों ..
बन माँ दुर्गा और काली तेरी मिटा
देगी ये हस्ती,
मिलेगा ना तुझे एक टुकड़ा कफन
आएगा न चिता पे कोई रोने ..
होने न पाए किसी बच्ची का अपमान
सबका हो यही कर्तव्य ..
विश्व बालिका दिवस की तभी है सार्थकता ..
Tuesday, 10 October 2017
प्रवाह
सुंदर जीवन बहती दरिया
नित्य नए गंतव्य की ओर
पाने को मंजिलें, रूके नहीं
खुशियों से करें प्रवाहित निरंतर ..
जीवन पथ हो कितने ही दुर्गम
सूझ बूझ से हो जाते हैं सुगम ..
गर कहीं ठहर गई हो जिन्दगी
तो रूके जल जैसे भर जाए गंदगी..
रूके जल में मछलियाँ भी 'जी'
कहाँ पाती ?
वैसे ही मन के भीतर निराशा की
'बास'आ जाती ..
रूकावट न आए जीवन गति में
बना रहे प्रवाह जीवन धारा में,
हो हमारी ऐसी ही कोशिशें..
सकारात्मक सोच से ही मिलती
है खुशियाँ ..
नकारात्मकता से बना लें खुद
से दुरियाँ ..
गर इरादों में हो बुलंदियाँ
तो रोक न सकेगी दुश्वारियाँ ..
जीवन के मधुर पल रखें संभाल कर
ये जीवन न मिलती फिर से दुबारा ..
Monday, 9 October 2017
ततबीर
मनुज बेसक अपनी जिन्दगी
तुम चाँद सितारों से भर लो
पर किसी के जिन्दगी में कभी
भूल से भी नअंधियारा फैलाओ
पथ में न ही उनके शूल बिछाओ
जाने क्यों जल्दी जल्दी में है सब
बिन परिश्रम उपलब्धियाँ चाहता
मेहनत किये बिन सफलता कहाँ
अधिक समय तक टिकाऊँ होता
ततबीर से खुद मंजिल कर हासिल
बना न जीवन में किसी को सीढ़ी
स्वार्थ में किसी का न कर इस्तेमाल
दूसरे के राहों में कभी न बाधा डाल
अपनी विजय खुद कर सुनिश्चित
बेकार है किसी को हराने की चाहत
अपनी काबिलियत से कर ले उन्नति ..
धूप व बारिश में भी तुम रूक मत
हो सके तो हम दूसरे के बने सहारा
थोड़ी ही सही दें खुशियाँ और प्यार
किसी की आहें कर देती है बैचेन
रूलाकर किसी को मिलता न चैन
Sunday, 8 October 2017
करवाँ चौथ
मेरे माथे पे सिंदुर
ललाट पे बिंदियाँ की
चमक रहे बरकरार
सलामत रहे सजना
तेरी जिन्दगानी ..
चाहे रूठने मनाने का
सजना से कितना ही
चले सिलसिला ..
पर कहाँ रूकता
दिल में आवेग !
एक दूजे से रहता
न कोई मलाल ...
मुश्किलों से भरा
जीवन सफर भी
एक दूजे से आसां
बन जाता ..
दिल का ये रिश्ता
सात जन्मों तक
साथ बना रहे ..
करवाँ चौथ में यही
वर मैं मांगती ..
चाँद!तू मेरे प्रीत की
गवाही बने हरदम
तुझे साक्षी मान
खुद को अर्पण
किया है अपने
प्रीतम को ...
अखंड सुहाग की
तुझसे आशीष मांगती..
मैं अपने पिया को
हर जन्म के वास्ते
ऐ चाँद !!
तुझसे हूँ मांगती ..