Tuesday, 7 November 2017

धरातल

पाकर  प्रसिद्धि को
 सरल बने रहना
 है मानवियता की
असली पहचान ।।
 
ऊँचाइयों पे पहुँचना
कोई दीगर बात नहीं
पर है बड़ी बात इसे
संभाल के रखना ।।
 
शोहरत के शिखर
सभी चढ़ते संभल कर
जरा सी असावधानी
लुढ़क ही जाते जमीन पर ।।

अक्सर लोग पाकर
नाम और शोहरत
घमंड में हो जाते हैं चूर
खुद को पीर समझने लगते ।।

फल विहिन वृक्ष तने ही रहते
अगर कोई वृक्ष हो
फल से लदे तो हमेशा
वो झुके ही रहते ।।

ऊपर पहँचकर भी जो
खुद को सर्वश्रेष्ठ न समझे
नीचे नजर से न देखे जो
धरातल पे रहने वाले को
वही महापुरुष कहलाते ।।

 
 

 

 

 

Monday, 6 November 2017

प्रतिकार

समझोता बिन जीवन
कभी न होता संपन्न ।
परिस्थितियों के सामने
लाजिमी नतमस्तक होना ।।
कल्पना भी नहीं करते
आ जाती ऐसी परिस्थिति ।
जिन्दगी कई इम्तिहान लेती
कभी परिवार कभी बच्चों या
जिविकोपार्जन की खातिर
करने ही पड़ते समझोते ।।
सफल विवाह का आधार
एक दूसरे से सामंजस्य बैठाकर।
खुद के अस्तित्व मिटाकर
चुप रहते सामंजस्य के खातिर ।।
 सहनशीलता का लाभ
उठाते हैं लोग कभी कभी ।
आत्मसम्मान पे न हो आघात
तब तक है जरूरी समझोता ।।
सामंजस्य सही पर गुलामी
असहनीय वेदना ।
सामने वाले की गलतियों
पर जरूरी प्रतिकार करना ।।

Sunday, 5 November 2017

भ्रूण हत्या

महरी के रोने से
तंद्रा भंग हुई मेरी
रो रो कर अपनीे
आप बीती वो सुना
 रही थी मुझसे ।।
दूसरे बिटिया के
जन्म लेते ही उसे
पति ने निकाल ही
दिया घर से ।।
अब क्या करें वो
कहाँ जाए ?
फरियाद करें किससे ।।
उसकी क्या है गलती ?
समझ में न आया उसे
आखिर बाप है वो कैसा ?
ममता ने भी न
पिघलाया उसे ।।
मन ही मन मैं
उसकी व्यथा सुन
आहत हो गई,
सोच में पड़ गई
देखकर उसकी दशा ।।
बेटा के चाह में स्त्री 
कितना दबाव सहती
कितनी तिरस्कृत होती
न जाने कितनी सहती यातनाऐं
ये एक औरत ही जानती ।।
समाज, परिवार ,पड़ोसी
सबके ताने से न होती विचलित
पर पति की उपेक्षा
न होता बर्दाश्त उसे ।।
इसलिए बिटिया पैदा
करने से वो ड़रती
और हो जाती शामिल
भ्रूण हत्या में औरतें ...
सिर्फ महरी की ही नहीं
ये आपबीती ।।
विकसित परिवार और शिक्षित
औरतें भी ऐसा करने को
विवश हो जाती ...

Saturday, 4 November 2017

मिलन

क्षितिज सिंदुरी हो उठा
धरती गगन कर रहे
मिलन की तैयारी ..
रवि बने हैं इनके गवाही
आह कितना अद्भुत दृश्य
सूरमई शाम भी दुआएँ दे रही
प्रकृति के इस अनुपम मिलन
सौन्दर्य की अनुठी है भेंट ।।
तारों के साथ चाँद भी
स्वागत में है रोशनी बिखेर
हर ओर खुशियों की बयार
खूबसूरत शमां दिलों को झूमा
प्रीत की आगोश में समा  
सम्मोहन की रंगों में नहा
अनगिनत ख्वाहिशों को पिरोकर
 प्रणय की बारिश कर रही  ।।
प्रकृति के इस अद्भुत रीति
सबके मन को कर लेती सम्मोहित ..
प्रयेसी के मिलन की आस सजाए
हर कोई उम्र भर करते इन्तजार ..
एक साथी के साथ की सबको जरूरी ।।
मन ही मन करते सब रब से विनती ..
बिन साथी के ये जग सुना
जिन्दगी के रास्ते लगते कठिन
कट न पाता जीवन सफर ..
तन्हा न कोई भी रहे..
एक अदद जीवन संगी बहुत जरूरी
मिलन के आस सबके हो पूरे ।।

Friday, 3 November 2017

स्मृति

सन्नाटे को चीरती 
पपीहे की मधुर तान
कर गई मुझे झंकृत
जेहन में लगी उभरने
कई मधुर स्मृति ...
जज्बातों के कई
अनछुए क्षण
मायूस कर गए..
एक एक लम्हें
तुम्हारे साथ बिताए
चल चित्र के तरह
स्मृति पटल पर
सजीव हो गया ..
हाथों में हाथ लेकर ..
वो बगीचे का सैर
या चाँदनी रातों में
घंटों चाँद को निहारना
 कितने सुकून भरे
पल लगते थे !!
एक तुम्हारे होने भर से ... ।
सारी दिनचर्या होती
तुम्हारे ही आसपास ..
अब खाली दिन
खाली शामें ..
बच्चे भी व्यस्त
खुद के संसार में ..
रह गयी मैं स्मृति
के एक एक तार
को पिरोने ...।।

Thursday, 2 November 2017

सृजन

परिन्दों की तरह
तिनके तिनके से
नीड़ बनाया ..
छोटे छोटे चूजे आए
अपने हिस्से के दानें
उसको चुगाया ..
बनाने को स्वावलंबी
क्षितिज में कुलाँचे
भरना सिखाया ..
पंखों में ज्योंहि उसे
 जान आया ..
उड़ गया गगन में
बनाने को खुद का
गंतव्य नया ..
चूजों से बिछुड के
परिन्दें तन्हा रह गए ..
मायूस हो के भी वो
चूजों के उड़ानों से
मुस्कुराया ..
बंधे हैं सभी फर्ज से
स्वार्थ से ऊपर कर्तव्य ..
जीवन का यही नियति
सृष्टि सृजन का यही रीति
धरती हमेशा ही देती
वैसे ही होते मात-पिता ..

Wednesday, 1 November 2017

खुशियों का कारवाँ

मन रे तू मत हो उदास
अपने पे रख भरोसा
समझ न खुद को बेबस

किसी से फरियाद न कर
बना न खुद को लाचार
हक न मिलता मांगने पर ।

जब निराशा मन को घेरे ले
अंधकार चहूँ ओर फैल जाएँ
तू उम्मीद की किरण थाम ले ।

जब हो सामने परेशानियाँ
जमाने ने दी हो रूसवाईयाँ 
तो धीरज को बनाना सहेलियाँ ।

जिन्दगी कई इम्तिहान लेती
मुश्किलों के पहाड़ों में घिर जाते
चतुराई से ही राह निकालना पड़ता ।

 गर हौसले में हो बुलंदियाँ
तो कदम चुमती कामयाबियाँ
खुशियों का कारवाँ भी संग चलती  ।