Wednesday, 13 June 2018

मुहब्बत

मुहब्बत में नाकामी दिल जला बना दिया         
 मिलन की आरजू ने मजनूं बना दिया

उल्फत में उनके रात दिन यूँ बैचेन रहते हैं
इक दीदार के वास्ते खुद को पागल बना दिया

जुदाई का गम सहना बहुत ही मुश्किल
खाक में मुहब्बत कलेजे चीर के रख दिया

अधूरी हसरतों की जैसे धज्जियाँ उड़ गई
अब परछाइयाँ ने भी उनका साथ छोड़ दिया

किसी से मिलना बिछुड़ना अपने बस में कहां
 रब के इशारा ने जैसे दो प्रेमी को मिला दिया




Tuesday, 12 June 2018

फैसला

शालू को सासु माँ और ताई जी हमेशा टोकती गुड़िया अब आठ साल की हो गई , अकेली बच्ची है उसके साथ खेलने के लिए कोई तो चाहिए.. "न जाने क्यों दूसरे बच्चे के बारे में नहीं  सोचते तुम लोग..! एकाकीपन का शिकार हो जाती,  ठीक से विकास भी नहीं हो पाता अकेली बच्ची का...!"

शालू ये सब सुन सुन के पक गई .."ये सब कहने की बात है !
आखिर सासु माँ को साफ साफ सुना ही डाली वो ...।"

"शालू सोचती, इस मंहगाई के दौर में  एक ही बच्चे का परवरिश अच्छे से हो जाएँ वो ही बहुत है ...। आजकल स्कूल की फीस , ट्यूशन व कोचिंग के खर्चे इतनी अधिक है कि, दो
तीन बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना मुमकिन नहीं....।"

मन ही मन वो उधेड़बुन में रहती, सोचती मुझे इस बारे में पति से विचार विमर्श करना चाहिए या नहीं, कहीं वो भड़क न उठे!
हिम्मत करके एक दिन अपने मन की बात उसने पति से कहा,

"ऐ जी  क्यों न हम फैमिली प्लानिंग करवा ले?...एक ही बच्ची रहेगी तो, उसको बेहेतर शिक्षा, साधन व सुविधा मुहैया करा सकते हैं ...हमारा सारा ध्यान भी उसी पे केंद्रित रहेगा ..!"

 पति हैरत से उसकी तरफ देखने लगा ..फिर बोला माँ को क्या कहेंगे? कहीं वो नाराज न हो जाए..!
शालू ने पति से कहा.. माँ धीरे धीरे समझ जाएगी ।
"एक ही बच्चा चाँद के समान हो तो हजारों तारे की क्या आवश्यकता ..?"

Monday, 11 June 2018

इरादा

निधि के पति असमय अपने पीछे दो छोटी बच्चियों को छोड़ प्रस्थान कर गए इस जहां से । अचानक आई  दुखों के पहाड़ से टूट गई वो । अपने भाग्य को कोसती .. "सोचती कैसे जीवन बिताऊँगी पति के बिना, बिन पिता के बच्चों का भविष्य कैसे संवारूँगी ! "

कई महीनों तक वो शोक से खुद को उबार न पाई ।  इस बीच लोग आते , अपनी अपनी राय देके चले जाते .. "कहते इतनी  अल्प आयु में अकेली जीवन काटना कठिन है, तुम्हें दुसरी शादी कर लेनी चाहिए...।"

"बुजुर्ग सास-ससुर को बेसहारा छोड़ना, और आए दिन बेटियों के साथ अनैतिक व्यवहार के खबरों ने.. खुद के स्वार्थ के लिए सोचना मन गवाह नहीं लिया उसका...।"

 निधि  ने बुजुर्ग सास - ससुर और बच्चियों के वास्ते खुद को मजबूत किया और अपने जीवन के एकांत नहीं अकेलापन को दिल से बाहर का रास्ता दिखाते हुए , मन ही मन कुछ फैसला लिया ...।"
 
आज वो घरेलू कुटीर उद्दोग शिविर में ट्रेनिंग के लिए सधे कदमों  से जा रही है .."अपने परिवार और बच्चियों के बेहतर भविष्य  के लिए ।" सास - ससुर को निधि  के बुलंद इरादे देख मन में  अजीब संतोष मिला...!

Saturday, 9 June 2018

बंदिशें

रोक न पाया जमाने की बंदिशें हमें
हम दीवाने पे लाख पहरे बिठाया

तकदीर में तुम मेरे ही थे तो मैंने       
 तुझे इसी जन्म में पा ही लिया

उम्मीद न थी कभी होगी मिलन
किस्मत ने हमें मिला ही दिया

प्रियतम से नजरें इनायते तो
हाथों के लकीरों में लिखी हुई

तुम न भी मिलते करती इन्तजार
सह लेती पल पल गमे जुदाई

सच्चे प्रीत गर हो प्रियतम से
सारी कायनाते मिलाते इक दूजे से...

Thursday, 7 June 2018

नशा

पार्टी अपने उफान पे था ।सब कोई मस्ती में डूबे हुए थे।
मधुर संगीत के धुन पर कई जोड़े थिरक रहे थे ।पीने वाले धीरे धीरे बार के ओर जाने लगे .."पर इन सबके बीच एक जोड़े ऐसे भी थे जो अपने में ही खोये थे...दोनों आॅरेंज जूस सीप करते हुए,एक दूजे के आँखों में गोते लगा रहे थे । एक अजीब खुमारी में दोनों डुबे थे ।"

इतने में राहुल - राहुल कहते हुए, कुछ लड़के आ गए उसके पास और उस लड़के को खींच के ले जाने लगा, ये कहते हुए की.. यार !"तुमको कितने देर से खोज रहे हैं ! तुम हो कि  भाभी के प्यार में डूबे हो ...चलो , मस्ती करते हैं !"बार में सब         इन्तजार कर रहे तुम्हारा !
 
राहुल ने अपने आपको छुड़ाते हुए कहा, "देखो ! यार मैं अब वैसा नहीं हूँ । मैंने पीना छोड़ दिया ..मुझे तो अब केवल तुम्हारे भाभी के प्यार का ही नशा है "....

Tuesday, 5 June 2018

गहरे रंग

पापा के निधन के बाद सबने कहा,तेरहवीं तक चटकीले रंगों के कपड़े कोई भी न पहने इसका ख्याल रखना, खासकर माँ के कपड़े हल्के रंग के होने चाहिए । माँ की अलमीरा में ढूंढने से भी हल्के रंगों की कोई साड़ी नहीं मिली। अंत में मेंहदी, फिरोजी ग्रीन कलर की साड़ियों के जोड़े उनके पहनने के लिए निकाल लिये गये ।

माँ मेरी बहुत गोरी है तो पापा हमेशा गहरे रंग की साड़ियाँ ही उन्हें लाके देते थे । मायके से भी उनकी भाभी लोग भी
चटक रंगों की साड़ियाँ ही दिया करती थी । माँ कभी भूले से हल्के रंग पहन भी लेती, तो हम सब उन्हें टोक ही दिया करते थे । हम कहते , "माँ आप पर ये रंग नहीं फबता है ।"

उनके बाल जब पकने लगे तो पापा उन्हें तरह तरह के डाय लाकर देते थे पर बाल में लगाने पर उनको एलर्जी हो जाती थी। बाद में डॉ ने डाय लगाने से सख्त मना कर दिया था।
फिर भी मैंने मेंहदी और काॅफी चायपत्ती को पानी में घोल 
कर माँ के बालों में लगा दिया ।माँ के उपर सुनहले बाल बहुत फब रहे  थे ..यह देख कर पापा बहुत खुश हुए । उनकी भाभी ( मेरी मामी ) माँ को देखकर जोर - जोर से हँसने लगी ।  माँ से बोली ," दीदी ये घोड़े जैसे बाल क्यों रंगवा लिए ?" पापा यह  सुनकर  बहुत नाराज हो गए ।उन्होंने मामी से कहा ,"गोल्डन कलर की खूबसूरती का वर्णन सभी पोयट अपनी कविताओं में करते आ रहे हैं । अंग्रेजी विषय के विद्वान होने के नाते विलियम शेक्सपियर को पढने के बाद पता चला है कि सुनहरे बाल कवियों को कितने लुभाते हैं.... ।"

आज पापा माँ के ऐसे रूप देख कितने दुखी हो रहें होंगे ये सोच के मेरे नेत्रों से अश्रुधारा बहने लगी ....।

तेरहवीं की लिस्ट बनाई जा रही थी फिर पंडित ने कहा,  "एक जोड़े सफेद साड़ी भी ले लेना माता जी के लिए ।"

मैं  वहीं सब सुन रही थी  तुरंत ही मैंने टोका , "ये दकियानुसी बातें हैं मेरी माँ सफेद साड़ी नहीं पहनेगी .... !"

प्रो उषा झा रेणु 

Friday, 1 June 2018

इन्सान के चेहरे ......*संजोग*

नैना दीदी नहीं रही अब इस दुनिया में ! ये खबर सुनके सहसा धक्का सा लगा , एक आह सी निकल गई ....
आँखों से अश्रुधारा बहने लगी । छोटे छोटे दोनों बच्चे बिन
माँ के कैसे पलेगा ," जीजाजी तो पहले से ही विक्षिप्त से हैं!! सोच के कराह सी निकल गई "..
बारंबार दीदी का चेहरा आखों के सामने नाचने लगा ...कितनी प्यारी और खुशमिजाज थी वो, सबसे गुणी भी।परिवार में सबसे कितना स्नेह करती ,बदले में हम सभी भी उनसे इतना ही प्यार करते । माँ -पापा की तो सबसे आज्ञाकारी संतान थी । परंतु चाचाजी ने न जाने क्यों.. इतनी हड़बड़ाहट में उनकी शादी कर दी, परिवार के किसी सदस्यों से राय भी नहीं ली
कहते हैं जोड़ियाँ उपर से बनके आती है , शायद दीदी के संजोग में यही लिखा था...पर हमसब तो चाचाजी के जिगरी दोस्त को ही दोषी मानते थे, जिसने चाशनी में लपेटकर झूठ को सच बनाकर पेश किया..उनके विश्वास में अंधे होकर उन्होंने अपनी तरफ से तहकीकात ही नहीं किया ।
खैर दीदी ने इसे अपनी नियति मान लिया । जीजाजी मंदबुद्धि थे और ससुर , खड़ूस बड़े बेटे को परिवार चलाने की जिम्मेदारी सौंप खुद जमिन्दारी को बढ़ाने में खोया रहता ..किससे वो क्या कहती !
ससुराल में छोटे भाई ने आँखों से जब उनकी स्थिति देखा ,दीदी को जरूरत के एक एक चीजों के लिए दूसरे के मुँह ताकते हुए, तो वो किसी की परवाह किए बगैर ले आया दीदी को ।
दीदी, अपने दोनों छोटे बच्चों को ले कर मायके में खुश हो के  रहने लगी ।
थोड़े ही दिनों में वो अपने गमों को भूलाकर बच्चों की पढ़ाई के साथ साथ, भाई और अपने पापा के हर कामों में हाथ भी बँटाने लगी ।
लेकिन लोग चैन से किसी को जीने नहीं देते हैं, जल्दी ही वो सबके एक ही सवाल, कितने दिन रहोगी ! कब जाओगी ससुराल? .. सुन सुनके पकने लगी ।
अपने पराये सबके एक ही सवाल से उकताकर, वो ससुराल चली गई । बच्चों को मायके में छोड़ दिया, क्योंकि वहां स्कूल दूर था ।
फिर दीदी कई सालों तक मायके आई ही नहीं,न ही किसी को अपनी समस्याओं के बारे मे कभी कुछ बताया । जाने कब वो गंभीर बीमारी के जकड़ में आ गई ,किसी को पता ही नहीं चल पाया ।
मायके में किसीने खबर दिया उनकी हालत बहुत सीरियस है,
चाचाजी नैना दीदी को ले आए, पर तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था ..एक दो दिनों में ही जिन्दगी ने उनका  साथ छोड़ दिया...
अब, जो लोग उनकी खिल्ली उड़ा रहा था, ...
अपने पति को छोड़ के मायके बैठी है !  "वही लोग कह रहे थे, हाय हाय मायके में दो रोटी ही तो खा रही थी ! यहाँ रहती तो क्या बिगड़ जाता ?"
"सचमुच हर एक इंसान में कई चेहरे छिपे होते हैं !!"