Saturday, 4 August 2018

आडंबर

आज कोर्ट ने फैसला दे दिया ...लडके वालों के पक्ष में ।
तलाक को जायज ठहराया गया ...।
कारण, "राजेंद्र बाबू ने झांसे देकर बेटी की शादी करायी थी.. ।"
" दिमागी रूप से अस्वस्थ है वह, जरा सा भी किसी को  आभास नहीं होने दिया ....। बेटी को अंदर ही रखते ताकि , इस बारे में कानों कान खबर नहीं हो... ।"

   राजेंद्र बाबू ने बड़ी धूम धाम से अपनी बेटी की शादी अमीर घर में कराई । लड़का भी सरकारी अफसर था । दहेज में देने को कुछ न छुटा था ...।
 महंगे कपड़े, फर्नीचर ,बढ़िया क्राकरी सेट , टी वी, फ्रीज गाड़ी व सोने व डायमंड से बेटी को लाद ही दिया था उन्होंने ....। दामाद भी खूब स्मार्ट लाए थे ...।

 शादी तक तो लड़के वाले बहुत खुश दिख रहे थे । विदाई के बाद न जाने क्यों लड़के वालों का मुँह लटक गया ...।

फिर तरह तरह की बातें सुनने में आने लगी ....।
कोई कहता लड़की सीधी है,ससुराल में घुल मिल नहीं पा रही..। कोई कहता सास बहुत तेज है, अपने बेटे को काबू में करके रखी है... ।
सच्चाई जो भी हो, अन्ततःराजेंद्र बाबू की बेटी दो महीने में ससुराल से लौट कर आ गई ...।
उसके बाद दोनों पक्षों में लंबी कानूनी लड़ाई चलने लगी..

 "उन्होंने मखमल में लपेट कर ऐसे पेश किया बेटी को....
जाने वो कितनी शर्मीली हो.. ।"
लड़की दिखाने के समय लड़के वाले से बेटी को दूर ही रखा .."ये कहकर कि शादी से पहले लड़की का लड़के से ज्यादा बातचीत या मेल जोल हमारे बिरादरी में उचित  नहीं है....।"
लड़की की माँ बहन के दो चार सवालों का जवाब तोते
जैसे रटा रटाया उत्तर दे दी... फिर उसे अंदर भेज दिया गया ....।
खैर उनको अपनी करनी का फल मिल गया ..."बेटी के घर बसाने का ख्वाब रेत के टीले के तरह बिखर गया ..।"
बेटी बेचारी को फालतू में ही सहना पड़ा इतना दुख.. !

बेटी के उपर, कहाँ इलाज में रूपये खर्च करना चाहिए ! उल्टे विवाह के आडंबर और दिखावा में राजेंद्र बाबू ने  पानी के तरह रूपये बहा दिया  ....।

खैर ! ..."अब पछताये क्या होत है,जब चिड़िया चुग गई खेत......।"


Thursday, 2 August 2018

सांवला रंग

शांता की शादी जिस लड़के से तय हुई थी। पता चला उसका सेलेक्सन इंस्पेक्टर में हो गया है । पूरा परिवार बड़ा डर गया, लगा ये रिश्ता भी हाथ से जाने वाला है.. !

 शांता की रिश्ते की बात जहाँ चलती उसके सांवले सूरत के कारण टूट जाती ...। अंत में एक साधारण परिवार का ग्रेजुएट लड़का से रिश्ता तय हो गया ।
सब कोई सगाई की तैयारी में व्यस्त थे, अचानक इस खबर से सोच में पड़ गए ... ।

वैसे तो लड़के वाले के घर से रिश्ते तोड़ने की कोई खबर नहीं आई थी, फिर भी गिरगिट के तरह रंग बदलने वाले जमाने के दस्तूर से परिवार के लोग अधिक ही आशंकित हो गए...।

शांता तो ये खबर सुनके निढ़ाल हो गई ,लगता उसे काटो
 तो खून नहीं ....।

"खैर सगाई का निमंत्रण देने से पहले, लड़के के घर जाकर पड़ताल करना ही मुनासिब लगा ...। शांता के बड़े भैया उसी समय ही विदा हो गए ...। उस रात घर में कोई नहीं सोया ...।"

"खासकर शांता के आँखों से नींद उड़ चुकी थी ...।"

वो सोचने लगी...गर रंग गहरा हो लड़कियों का तो सारी डिग्रियाँ ,सारे हूनर शादी नाम के पैमाने पर अनफिट है ..।

जाने मेरी किस्मत में क्या लिखा है, उसने सोचा !
खैर कल के भोर तो सब कुछ स्पष्ट हो ही जाएगा ! अधिक सोच के क्या फायदा ...?

अगले दिन भाई साहब आ गए, सब कोई रिश्ते के बारे में जानने को बेताब थे ! शांता भी पर्दे के ओट से सब सुनने लगी।
भैया ने कहा बड़े अच्छे लोग हैं, लड़के व उनके माता पिता ने कहा ...
"लड़की बहुत भाग्यशाली है, उसी के वजह से ये खुशी मेरे घर आई । जाईये आप लोग सगाई की तैयारी कीजिए ....।"

"जोड़ियाँ तो उपर से बनके आती है , हम और आप उसे मिलाने के निमित्त मात्र हैं ...।"

Tuesday, 31 July 2018

भूल सुधार / लघुकथा

सुबह सुबह रवि को बहुत  सारे लोगों के जोर जोर से बोलने की आवाज सुनाई दी ... ।
वो भी आवाज की दिशा में चल पड़ा । उसने घर के पिछुआड़े में पोखर के बराबर पाट पर देखा बहुत से लोगों को गहन विचार विमर्श करते हुए । नजदीक पहुँच कर उसने किसी से पूछा आखिर माजरा क्या है ....?
उसने कहा नीचे देखो ...!
नीचे एक अर्धविकसित नन्हीं के शव  देख वो एकाएक चौंक गया....!!
सबने बताया ! हीरा चाची सुबह पोखर नहाने आई उसी ने
नन्हीं के शव को किनारे में देख गाँव वाले को बताया ...
सभी लोग आपस में सोचने लगे आखिर कैसे ढूँढा जाए इस जघन्य पापी को ....?
फिर विचार हुआ ! नर्स को सबके घर जाँच करने भेजा जाए..... ।
जल्दी ही सच्चाई सबके सामने आ गयी... "वो एक कुँवारी किशोरी निकली ...।"
नन्हीं के पिता कौन है सबने जानने के लिए उसपर दबाव बनाया ...।
लड़की ने जिस लड़के पर अंगुली उठाई वो गाँव के संभ्रांत परिवार का सजातिय बेटा ही निकला ... सब कोई आश्चर्य चकित हो गए... !
लड़की ने बताया, शादी के झांसे देकर उसने रिश्ते बनाया .....बाद में वो मूकर गया ....।
लड़की और उसकी माँ पापा फफक कर रोने लगे....और
कहने लगे भूल सुधार का यही उपाय सूझा....हम गरीब बड़े लोगों का क्या कर लेंगे ....?
पंचों ने लड़की और उसके माता पिता को पहले बहुत डाँटा...उसने कहा तुम लोग कब तक इस कूपमंडुता से निकलोगे..... !
" चोरी छिपे संबंध बनाने वाले धूर्त इंसान रिश्ते को कभी
भी अपना नाम नहीं दे सकता ...?"
शुरू में लड़का स्वीकार ही नहीं कर रहा था अपनी  संलग्नता..... !
"जब पंचायत वाले ने डी एन ए टेस्ट और मामले को कोर्ट में खिंचने की धमकी दी तो .....वो मान लिया अपना करतूत....।"
इस तरह का जघन्य अपराध फिर से कोई करने की हिम्मत न करे, इसलिए पंचों ने विचार विमर्श कर दोनों की शादी कराना ही उचित समझा ... ।
फिर पंचायत वाले ने लडका व उसके घर वाले पर ..... "किशोरी से शादी करने का फैसला सुनाया । गाँव वाले के उग्र रूख को देखकर और परिवार की बची खुची इज्जत  को ढकने के लिए शादी करने में ही उसने अपनी भलाई समझी..।"
सबके उपस्थिति में, "उसने लड़की के गले में माला डालकर मांग भर दिया ...पंचों के इस शर्त पर कि वो लड़की को कभी प्रताड़ित नहीं करेगा ।"

भूल सुधार / लघुकथा

सुबह सुबह रवि को बहुत  सारे लोगों के जोर जोर से बोलने की आवाज सुनाई दी ... ।
वो भी आवाज की दिशा में चल पड़ा । उसने घर के पिछुआड़े में पोखर के बराबर पाट पर देखा बहुत से लोगों को गहन विचार विमर्श करते हुए । नजदीक पहुँच कर उसने किसी से पूछा आखिर माजरा क्या है ....?
उसने कहा नीचे देखो ...!
नीचे एक अर्धविकसित नन्हीं के शव  देख वो एकाएक चौंक गया....!!
सबने बताया ! हीरा चाची सुबह पोखर नहाने आई उसी ने
नन्हीं के शव को किनारे में देख गाँव वाले को बताया ...
सभी लोग आपस में सोचने लगे आखिर कैसे ढूँढा जाए इस जघन्य पापी को ....?
फिर विचार हुआ ! नर्स को सबके घर जाँच करने भेजा जाए..... ।
जल्दी ही सच्चाई सबके सामने आ गयी... "वो एक कुँवारी किशोरी निकली ...।"
नन्हीं के पिता कौन है सबने जानने के लिए उसपर दबाव बनाया ...।
लड़की ने जिस लड़के पर अंगुली उठाई वो गाँव के संभ्रांत परिवार का सजातिय बेटा ही निकला ... सब कोई आश्चर्य चकित हो गए... !
लड़की ने बताया, शादी के झांसे देकर उसने रिश्ते बनाया .....बाद में वो मूकर गया ....।
लड़की और उसकी माँ पापा फफक कर रोने लगे....और
कहने लगे भूल सुधार का यही उपाय सूझा....हम गरीब बड़े लोगों का क्या कर लेंगे ....?
पंचों ने लड़की और उसके माता पिता को पहले बहुत डाँटा...उसने कहा तुम लोग कब तक इस कूपमंडुता से निकलोगे..... !
" चोरी छिपे संबंध बनाने वाले धूर्त इंसान रिश्ते को कभी
भी अपना नाम नहीं दे सकता ...?"
शुरू में लड़का स्वीकार ही नहीं कर रहा था अपनी  संलग्नता..... !
"जब पंचायत वाले ने डी एन ए टेस्ट और मामले को कोर्ट में खिंचने की धमकी दी तो .....वो मान लिया अपना करतूत....।"
इस तरह का जघन्य अपराध फिर से कोई करने की हिम्मत न करे, इसलिए पंचों ने विचार विमर्श कर दोनों की शादी कराना ही उचित समझा ... ।
फिर पंचायत वाले ने लडका व उसके घर वाले पर ..... "किशोरी से शादी करने का फैसला सुनाया । गाँव वाले के उग्र रूख को देखकर और परिवार की बची खुची इज्जत  को ढकने के लिए शादी करने में ही उसने अपनी भलाई समझी..।"
सबके उपस्थिति में, "उसने लड़की के गले में माला डालकर मांग भर दिया ...पंचों के इस शर्त पर कि वो लड़की को कभी प्रताड़ित नहीं करेगा ।"

Friday, 27 July 2018

सावन सुहावन

घनन घनन घन मेघा बरसे
सावन आये जिया हर्षाये

बिजली चमके दामिनी दमके
मुझको डराए कारी कारी रैना
रह रह के मेरे ये दिल धड़के
आई है कैसी रूत ये सुहानी 

घनन घनन घन मेघा बरसे
मन आंगन में खुशियाँ बरसे

बागों में कोयल कू कू कुहके
सावन में देखो पड़ गए झूले
कजरी गावे सखी सब मिली के 
प्रियतम संग सब पींगे झूले

घनन घनन घन मेघा बरसे
सावन आए जिया जलाये

हाथों में सब मेंहदी सजावे
करके श्रृंगार पिया को रिझावे
विरह की मारी किछु नहीं भावे
तुम बिन सजन मुझे चैन न आवे

घनन घनन घन मेघा बरसे
मोरे पिया परदेश सिधारे

जा रे बदरा तू जिया न जला
विरह की मारी वन वन भटकूँ
ओ री पवन तू पी को बूला ला
पड़ जाए चैन मोरे हिया को

घनन घनन घन मेघा बरसे ..
सावन आए जिया हर्षाये

Thursday, 26 July 2018

वादा

नेट पर पी सी एस का रिजल्ट देखते ही शंकर के आँखों से खुशी के अश्रु बहने लगा । उसके बेजान जीवन को मानो संजिवनी बूटी मिल गई ...।

अपने माँ पापा व गुरूजनों के आशीर्वाद लेने के बाद...वो
जल्दी जल्दी वाइक निकालकर आनन- फानन में ही पहुँच गया अपने प्रियतमा के घर सफलता का परचम लहराने....।

जहाँ,प्रिया के मम्मी पापा के साथ सभी लोगों ने ढेरों बधाईयाँ दी,सब कोई गर्मजोशी से उसका स्वागत करने लगे। इसी पल के इन्तजार में उसने जाने कितने ही रातें  जग के बिता दिया था ....।

रिजल्ट निकलने से पहले वो डरा डरा सा रहता, पेपर से संतुष्ट होने के बावजूद स्पर्धा के भेंड़ चाल से भयभीत था  ..।
रात दिन यही ख्याल सता रहा था कि, अगर उसका सेलेक्सन पी सी एस में नहीं हुआ तो प्रिया से जीवन भर
 के लिए बिछुड़ जाएगा । अब कोई मौके भी नहीं देंगे प्रिया के घरवाले ..।

दोनों का मिलना एक इत्तेफाक ही था..."जाने कैसे एक
दिन शंकर की नजर प्रिया पे पड़ गई....!
जबकि दोनों का क्लास अलग अलग था । शंकर बी ए आनर्स और बी एस सी में प्रिया थी...।"

शंकर का अधिकतर समय प्रिया का पीछा करने में बर्बाद होने लगा । वो जहाँ जाती पीछे पड़ जाता । पढ़ने लिखने में उसका मन तो लगता नहीं था, बस प्रिया के प्यार में दीवाना बना फिरता । इस चक्कर में मेधावी प्रिया की पढ़ाई बाधित हो रही थी ... ।

"नाहक ही प्रिया बदनाम हो गई थी...।"

एक दिन प्रिया ने हिम्मत करके शंकर से कहा, अगर आपको मुझे पाना है तो कुछ बनके दिखा दीजिए.. मैं आपसे शादी करने के लिए अपने घर वालों को मना लूँगी ....।

परन्तु जब तक आप कुछ न बन जाएँ, हमसे न मिले इसका वादा करना होगा ...।

"शंकर ने बोला ठीक है पर ये बात तुम्हारे मम्मी पापा के मुँह से सुनना चाहता हूँ... ।"

प्रिया ले आई शंकर को अपने घर, परिवार के लोगों ने भी यही कहा ...।
"आज शंकर ने लक्ष्य भेद कर प्रेम को नई उँचाई बख्स दी...!!"
कहते हैं गर प्यार सच्चा हो तो उसे मिलाने में सारी कायनाते एक हो ही जाती ...।

बुलंद हौसला

उफान देख नदियों का
मांझी गर दिल थाम ले
छोड़ दे हाथ पाँव चलाना
तो मझधार में ही डूबके
रहेगी किस्ती उनकी ..
हिम्मत वाले तूफानो को
गुजर जाते छू के ..

नाव लहरों के हवाले
छोड़ देते हैं बुजदिल
बुलंद हो अगर हौसला
तो समुन्दर के बीच से
वो जाते हैं निकल ..

जग के जाने कितने झमेले
अनेकों होते यहाँ भेड़ चाल
जीवन के इस माया जाल
से निकलना बहुत मुश्किल
आत्मबल से मिलता है हल

जो मन से हार मान ले
डर जाए देख लहरों को
वो बैठे रहते साहिल पे
घबरा के...
साहस को जो साथी बना ले
वो ही पार करते भव सागर को..