Saturday, 12 January 2019

अंकुश

विधा - गीत

    नया दौर ने बचपन छीना, बदले खेल खिलौने
    इन्टर नेट पर गेम खेले,, मासुमियत लगे खोने

   लुका छिपी,गिल्ली डंडा पता ,,कहाँ!खो खो किसी को
   मैदान पर खेलों के लुफ्त,,,से बंचित अब अनेकों
   बच्चों के खेल बदल गए न,,,,,वो टायर भगा रहा
    देखे बैठे बैठे जहान,,,,घरों से न निकल रहा
   प्रकृति के संग जो रहते हैं ,,नहीं पड़े कभी रोने
   इन्टर नेट पर गेम ...
 
  खेलता नहीं अब कोई भी,,सब फोन के दिवाने
  लद गए दिन सभी बच्चों के ,, बहाने के वो पसीने
  पढ़ाई में मन नहीं लगता,,, बहाने रोज बनता
  रोते हैं माँ बाप देखकर,,,मंजिल न उसका दिखता
  छोड़ दे अपनी ये आदतें  ,, हमें ही हैं रोकने
  इन्टरनेट पर गेम ..
 
  किताबों की भीड़ में खोये ,सिलेबस बहुत भारी
  माँ बाप की बढ़ती आकांक्षा,,,पिसते बारी बारी
  वक्त कम है बच्चों के लिए ,,,व्यस्त सभी अभिभावक
  जीवन के तेज रफ्तार ही,,आज बना है बाधक
  परिस्थिति के दास मनुज सभी,,,वही बनाते बौने
  इन्टरनेट पर गेम ...
 
राॅक गीत सुनके खुश होते,,,भाये मैगी खाने
कानों में आई पाट लगा,, शौक लगे फरमाने
शिक्षा जरूरी है जीवन में ,,यही तो सिखाने हैं
सुंदर भविष्य के लिए बच्चों ,, पे अंकुश जरूरी है
अभिभावकों को संस्कार के,,बीज अब है बोने ...
 इन्टरनेटपर गेम खेले ...
 
 

  
   

तारीख

विधा- प्रदोष छंद

यौवन के दहलीज पर,,, बच्चों होश न गवाँना
मशाल शिक्षा का लेकर ,,,जगत में अलख जगाना ।।

रास्ते कितने कठिन हो,,,विश्वास न खुद पे खोना
कदम ड़गमगा गया तो ,,,जान ! जीवन भर रोना ।।

आलस्य का करो त्याग ,,सामने भविष्य तेरे
 मेहनत करने से बने,, सुनहरे जीवन तेरे   ।।

पढ़ने लिखने पर मिले,, जीवन में सुख सम्पत्ति 
भविष्य होगा उज्ज्वल,, फैलेगा यश और कृति ।।

बुरे संगति में पड़ोगे,, जीवन बेकार  होगा
बिगड़े सुधर जाते, मित्र, संस्कार वाले होगा ।।

पत्थर पर लकीर पड़े, रस्सी घिसा जाएगा ।
आँखें लक्ष्य पे साधना,,मंजिल अवश्य मिलेगा ।।

माँ पिता करेंगे नाज ,,, तुम उनका सम्मान हो
बच्चों में पले सपने ,,,,इतना तुमको ज्ञान हो ।।
      
लिखो देश की तकदीर ,,,सब तारीख है तेरा
कर्म से इतिहास बदल,, हथेली में कल तेरा ।।

दुश्मनों के चाल तुझे,,नाकाम करने होंगे
देश के तकदीर लिखो,,गौरवान्वित सब होंगे ।।

ढ़िढोरा (गजल)

रदीफ- में
काफिया- आने

सरल व कोमल जानके लगे सब हथियाने में
सब समझके फिर भी जुटे हैं अपना बनाने में

तिनके तिनके जोड़ नीड़ बनाने में वो बेपीर  
मरते दमतक कोशिश करते रिश्ते बचाने में

मजलूमों के दर्द कोई नहीं समझा करते हैं
संसार में सब तैयार बैठे हैं कहर बरपाने में

जीगर पे लगे जख्म सह लेते हँसते हँसते
पीर देने वाले ताक में फिरते हैं आजमाने में

व्यथा  को बाँटने पर जग हँसाई ही करवाते
लोगों को मजा आता है ढ़िढोरा पिटवाने में

किस्मत में लिखे चाहे कितने गम क्यों न हो
फिर भी पी रहे हैं दर्द, लगे हुए हैं छुपाने में

मुहब्बत में बेवफाई तो को नई बात है नहीं
जाने क्यों दिलबर संग लगे ख्वाब सजाने में

जले पे रखना नमक, है आम बात लोगों की
कोई कोई ही लगे रहते हैं, रोते को हँसाने में

उजड़े घरों को बसाना है बहुत नेकी की बात
ऐसे फरीस्ते ने काम किया मनुजता बचाने में

Thursday, 10 January 2019

प्रेम नशा

विधा- सार छंद

उमंगों भरे वो नायाब पल ,,,थे बहुत ही सुहाने
ख्वाब भी हकीकत सा लगता,,मदहोश दो दिवाने
मन की कलियाँ चटक रही थी,,,भ्रमर सा गुनगुनाता
बाहुपास में प्रिय के हरदम, उर बहुत मचल जाता

बजते थे दिल के साज मधुर,,, प्रीत ने चैन लूटा
पुरवाई जब तन महकाया,,, हद बंदिशों का टूटा
 नैनों में सपने साजन के,,,धीर न आस बंधाये
 जिया में बस गए पी ऐसे,  मन को कोई न भाये

आशिकी सिर चढ़ के बोलता, ढूंढे मिलन बहाने
मुहब्बत में आकंठ डूबे , देख बुत थे जमाने..
प्रियतम का जादू जब चलता,हृद रंगीन हो जाता
नशा के इस आलम में नयन, प्रेम बूँद बरसाता

आलिंगन को तरसे प्रियेसी,  शब्द मधुर टपकाते
मिलन बेला के इन्तजार में , वो दिन रैन गवाँते...
प्रेम मदीरा जो पी लेता,,,  लोग कहते दिवाना
जवां दिल राही एक पंथ के , ख्वाब मिल के सजाना
 

 
 

Sunday, 6 January 2019

आया जन्म दिन

जग को रौशन तो चाँद सूरज करे
मेरे जीवन में उजाला तुम ही भरे
अंधेरों में तेरा नूर जगमगाया करे

नेकी व अच्छाई तुममें हरदम रहे
तेरे चेहरे पर मुस्कान यूँ सजी रहे
तेरी मम्मी पापा की यही है आशीष
राहों के शूल तेरे पग न घायल करे
अंधेरों में भी तेरा नूर जगमगाया करे

सरस्वती जी की कृपा तुझपे बनी रहे
मंजिल पथ पर कदम तेरा बढ़ता रहे
रूकना न कभी तू किसी से हारकर
जग में तू उँचा मकाम हासिल करे ...
अंधेरों में भी तेरा नूर जगमगाया करे

विनम्रता और मानवता हो संबल तेरा
हमेशा इनको सहचर बनाकर रखना
निश्चित ही बजेगा हर ओर डंका तेरा
दुआ है,निज ख्वाबों को तू साकार करे
अंधेरों में भी तेरा नूर जगमगाया करे ...

गौरवान्वित मात पिता को कर जीवन भर
बुद्धि और विवेक से कभी वंचित न होना
धन्य हो जाएँगें वो, जी उठेंगे तुझे देखकर
हर युग में तू पूत बने,रब से दिल मनाया करे
अंधेरों में भी तेरा नूर जगमगाया करे...

 हृदय पुष्प सा खिला है आज सबका
आया है दिन हम सब के खुशियों का
जन्म दिन की ढेरों शुभकामनाएँ बेटा
हम हर साल यूँ जन्म दिन मनाया करें
अंधेरों में तेरा नूर यूँ जगमगाया करे...

Saturday, 15 December 2018

अंतस् के पीर

अंतस् के पीर दृग से बह रहे अविरल
विरह दंस से बिंध कर हृदय है घायल

किसी ने मेरा जहां इस कदर लूटा
नैनों ने अश्कों का दरिया बहाया
मुहब्बत के बेबसी में दिल है टूटा
बीच मझधार में पतवार जैसे छूटा
किस्मत मेरी रूठी मिली न मंजिल

अंतस् के पीर दृग से बह रहे ...

लाख रोकने पे भी रूका कहाँ दिल
मुहब्बत में हार ही गया उनपर दिल
जज्बातों से केवल मिलता नहीं दिल
किसी से बेइन्तहा प्यार हुआ गुनाह
वेदना ही उपहार है,मिला न दो दिल

अंतस् के पीर दृग से बह रहे ...

टूट कर चाहा फिर भी उनको न पाया
बिछुड़ कर उनसे मैंने सुख चैन गवाया
जीवन भर का गम न जाने क्यों दिया
मेरे बिखरे अरमां पे आसमां भी रोया
उनके बिन अब जीना हुआ मुश्किल

अंतस् के पीर दृग से बह रहे ...

रब न करे किसी का कभी टूटे दिल
बहे न नयनों से किसी का भी अश्क
दो तन होकर भी मिले दिल संग दिल
आकुलता से तप्त हृदय का हो मिलन
प्रीतम संग नेह दीप जलते रहे हर पल

अंतस् के पीर दृग से बह रहे अविरल
विरह दंस से बिंध कर हृदय है घायल

 

 

Wednesday, 12 December 2018

मनुहार पुत्र से

विधा-गीत

मेरा लाड़ला हो गया अब तू जवान
तरस रही देखने को मैं तेरी दुल्हन

सुनो बेटा ले ले कुछ तुम रूपया
नहीं चाहिए मुझको तुमसे चूड़ियाँ
ले आना तू मेले से सुन्दर सा हार
लाना मेले से प्यारी सी एक गुड़िया
पहनाना हमारी प्यारी बहुरानी को
चाँद सी बहू को दिखा दे बेटा
तेरे संसार सुखी देख जी उठुँगी
रब करे सजी रहे तेरे शक्ल पे मुस्कान
मेरा लाड़ला हो गया अब तुम जवान
तरस रही देखने को मैं तेरी दुल्हन ...

मेरे बाद भी मेरा नाम अमिट न हो
मेरे परिवार फले फूले यही चाह है
बस प्यारी सी बहूरानी ला दे तुम
बस हमारे दिल में यही तमन्ना है
मेरे आंगन खिले सुंदर सुंदर फूल
उसके खुशबू संग महके मन आंगन
नन्हें मुन्ने की किलकारी का हो गूंजन
मेरा लाड़ला हो गया तू अब जवान
तरस रही देखने को तेरी मैं दुल्हन .....

ख्वाब हमारा सच हो ये सबकी चाहत
बाग खिला रहे माली की यही चाहत
नव पौध भी बने उन्नत व विशालकाय
माली करते हैं मन से हमेशा ही सिंचित
हमारा कुल का जड़ हो इतना गहरा 
आंधी में भी ना टुटे वृक्ष रूपी परिवार
फल फूल से सजा रहे मेरा बगियन
मेरा लाड़ला हो गया तू अब जवान
तरस रही देखने को तेरी मैं दुल्हन ...