Wednesday, 16 January 2019

रिमझिम फुहार

विधा- गीत
सावन सुहावन लाई बरखा बहार

सन सन पवन चले हिया में करे शोर
उड़ते घुमड़ते बादलों को देखकर
धड़कनें लगी अरमां दो दिलों की 
आसमान से बरस रही बूँदे हजार
सावन सुहावन लाई ...

गगन में देख कर घटाएँ घनघोर
मुदित चातक स्वाति बूँदें देखकर
पपीहा गाने लगी नाचने लगे मोर
किसलय से सुसज्जित बन हुए हरे
कलियाँ खिली, बागों में आई बहार
सावन सुहावन ...

बादल के गर्जना से दामिनी दमकी
टीप टीप बूँदनियाँ भी छत पे टपकी
सौंधी सौंधी जब खुशबू छाये मिट्टी की
प्रियतम से मन मिलन को तब तरसे
आसमान से  गिर रही रस की फुहार
सावन सुहावन ....

मचले हैं अरमान, कदम भी बहके
बूँदों की रिमझिम सुनके मन थिरके
मन के भाव जगे जब घिर आई बदरा
ताप मिटे हिय के ,सुर सजाती जियरा
प्रीत के हिलोर में डूब जाता है संसार
सावन सुहावन लाई ....

Monday, 14 January 2019

उपहार

विधा-- ललित छंद
16/12

प्रियतम बिन विरह की मारी,,,नैन बहे जल धारा
 शूल बन गई सेज हमारी ,,,, मुझे पीर ने मारा

आया है ऋतु पावस देखो,,,  लेकर रिमझिम बूँदें
अगन बढ़ाए मिलन की, जगे  ,,,चाहतों की उम्मीदें 

तड़पते हैं हम तुम विरह में, दिल वियोग में हारा
शूल बन गई सेज हमारी,,, मुझे पीर ने मारा..           1.

गरजे हैं नभ में बादल क्यों  ,,,देते  उन्माद  जैसे
तरसे उर अब प्यास बढ़ाती,,,हुए व्याकुल ऐसे

दग्ध हृदय की चैन छीन रही,,, वेदना बहुत भारी
सजनी बैठे राह निहारे,,, अंखिया भी है हारी

अनगिनत ख्वाब नैन में सजा,,,, धरा ने नभ उतारा
शूल बन गई सेज हमारी,,,,,   मुझे पीर ने मारा      ...2.

पवन झूम के तुझको बुलाये,,, क्यों मुझको भूल गए
बनी आज धरती है दुल्हन,,, जाने किस देश गए

 मचल रहे हैं अरमान बूँद,,, प्रेम उपहार लाए
 मेघों के गर्जन नर्तन भी,,,पी के याद दिलाए

बाग में कुहूके कोइलिया  ,,,सुनके लगता प्यारा
शूल बन गई सेज हमारी,,,, मुझे पीर ने मारा    ...3.

 

Sunday, 13 January 2019

नेह का बंधन

चाँद सूरज सा चमके भाई, चाहत हर बहनों का
बहन को दे प्यार हर भाई ,यही उपहार राखी का

एक ही आँचल के वो सितारे
नेह डोर से बंधे दोनों का प्यार
भैया तू रहना हमेशा सलामत 
बहनों के दिल की यही पुकार

अक्षत रोली चंदन से कर तिलक
रब से ले अभय वरदान जीवन का
जीवन में खुशियों के दीप जले
बहना आरती उतारती भाई का

रेशम की कच्ची डोरी से बंधे, प्यार भाई बहनों का
बहनों को दे प्यार हर भाई, यही उपहार राखी का

भाई बहनों को मान देना हमेशा
रहने न देना तुम कभी भी उदास
बहनों की सदा इतनी सी ख्वाहिशें
रिश्ते रहे अटूट स्नेह के जज्बातों से

बहनों का हिम्मत टूटने न देना
विपत्तियों में रखना तुम ध्यान
मायके याद आए तू लिवा लाना
वहां के कहकहों से रूबरू कराना

रब से मांगे भाइयों के वास्ते, पूरे हो ख्वाब उनका
बहनों को दे प्यार हर भाई, यही उपहार राखी का

सूखे वृक्ष

समय को लग जाते हैं पंख
सुख के दिन कितने जल्दी
तीव्र वेग से बीत जाता
पता ही नहीं चलता ...

खुशियों को समेटते समेटते
जीवन की सांझ ढल जाती
रूप यौवन खत्म हो जाता
पता ही नहीं चलता ...

कुछ बनने के धुन में खोकर
बचपन वक्त के तीव्र वेग से
तालमेल बैठाने में लगा रहता
वक्त तो हर पल बदल जाता ..

युवावस्था में परिवार व बच्चे
के बीच फर्ज निभाते निभाते
वक्त हाथों से फिसल जाता
पता ही नहीं चलता ..

फर्जों के इस आपाधापी में
बहुत से काम अधूरा रह जाता
ख्वाहिशें कई अधूरी रह जाती
समय बड़ा ही बलवान होता ..

जीवन के पौधे छायादार वृक्ष बन
जाने कब सूखने लग जाता
समय चक्र कब बदल जाता
पता ही नहीं चलता ...

पौधों को हर कोई ही सिंचता
पेड़ बन फल फूल जो वो देते
जीवन की कैसी ये अद्भुत रीत
सूखे पेड़ को कोई न पूछता ..

यौवन का संग जब होता
सब कोई नतमस्तक होता
सूखे पेड़ को सब काटता
हर कोई ही उसको जलाता

हो जाते हैं जीर्ण शीर्ण देह
विवशता पे अपनी वो रोते
जीवन जीवंत खत्म हो जाता
पता ही नहीं चलता ...

Saturday, 12 January 2019

वेदना

विषय मुक्तक--दुःख

तुम बिन जीना अब दुश्वार हो गया  
तुम संग थे तो जीवन फूल बन गया
दिल को दर्द गम है तेरे वियोग का 
मुहब्बत का गम तुम ता उम्र दे गया
       
तिनके तिनके से एक नीड़ बनाया था 
अपने नन्हें चुजों  को दाने खिलाता था
पंख ज्यों ही आया वो उड़ गया फूर्र से
पाखी का दुख ही संग साथ अपना था

रूबाई  / गम

तेरी याद  एक   नासूर  घाव
तू अब देख बीच  मझधार नाव
जाने क्यों गम दिए ,गए चौराह छोड़
किस्मत पे प्रिय लगा दिया है न! दाँव

यादों में  हो शामिल , हो यार कहाँ !
राहों  में  हो  फूल, वो तकदीर कहाँ !!
कर जाओ रुसवा गर सनम,   मुझे
घुट जाएंगे  साँस,  वो मुहब्बत कहाँ ।।

 

एहसास

विधा  कुण्डलियां

मंजिल चाहे दूर हो, माझी करना पार    1.
पाना हमको लक्ष्य है, मानना न तुम  हार
मानना न तुम हार, इरादा कर लो पक्का
हिम्मत है हथियार, बात यही सच सौ टका
जीत अवश्य होगी , मन को रखना तुम अटल
रास्ते कितने कठिन,मिलेगी अवश्य मंजिल

 करता दिल याद अब भी , प्यार की मुलाकात   2 .
 कैसे नयन चार हुए ,  ताजा है सब बात
 ताजा  है सब बात, उर करता झंकृत अब भी
 वो मद भरी एहसास ,,नहीं भूलता मन कभी
 प्यार का वो आलम, बरबस क्यों याद आता
 मदहोश थे हम तुम,,, मिलन को मचला करता

साजन तेरे प्यार में , अश्रु बहाते हैं नैन।            3.
जब तक न देख लूँ तुझे, मिले न मुझको चैन।।
मिले न मुझको चैन , मिलेगी हमें वो ख़ुशी  ।
तेरे  दर्शन से ही ,  सजेगी अधर पे हँसी ।।
दिलबर तू देख ले , मेरा दयनीय जीवन
संग तुम मेरे रहो , फिर न मुरझाऊँ साजन ।।
 
प्रीतम तेरी याद में , मौसम बदला जाय।        4.
सावन में बूँद बरसे, जियरा बहुत जलाय  ।।
जियरा बहुत जलाय, उर में भरे सूनापन ।
 बूँदे मोती बने ,  मुस्कराए मन आंगन   ।।
 प्रेम प्याला पी के , होश हो जाते हैं गुम ।
प्रीत के सागर में , हम तो डुबे हैं प्रीतम  ।।

नूतन वर्ष

देकर कितनी यादें बीत गए फिर से ये साल
तमन्नाओं की पिटारे  लेके आ ही नए साल

एक एक क्षण जीवन के हम सबके चुराकर
तीव्रता से  बीत ही गए बरस, नए तजुर्बे देकर

मंजिल की चाह में चलते रहे राहों में अकेले
छुट गए अपने जिनके अंगुली को पकड़ चले

कितने यादें व मुलाकातें, कई आदतें व वास्ते
अनकही खुशियाँ व गम न भूलने वाली दे बीते

सुखद अनुभूति कभी किया रोमांचित जीवन को
कभी अवसाद ने शिथिल कर दिया मेरे जीवन को

कितने ही अरमां दिलों के पूरे हुए गुजरे सालों में
रिश्तों के रंग दिखे, बूँद स्नेह के भी गिरे आँचल में

अंजाने शहर में मिले कई चेहरे, बने खास दिल के
अपनों ने दी शिकस्त, कर गए वो टुकड़े दिल के

रब ने दी सौगात हमें खुशियों की गुजरे सालों में
अरमानों की झोली पर भरती नहीं कभी दिल में

नूतन वर्ष भी लेके आ जाए ख्वाबों के हजारों रंग
बैर मिटाकर दिलों से, हृदय में भरे  प्रीत के  रंग