फरेब करना भी
एक कलाकारी
है जनाब ..
बड़े ही शातिराना
चाल ये चलते ..
पहले धीरे धीरे
पास पहुँच कर
दिल में उतरते ..
फिर धीरे धीरे
मीठे जहर के
के तरह असर
करने लगता
दिलों दिमाग पर
और रिश्तों के जड़ो
को ही काटना
शुरू कर देता
मीठी अपनी
चालाकियों से ..
डंके के चोट पर
की गई दुश्मनीं
से कोई आहत
न होता पर अपनों
की फरेबी से
टूट ही जाता ..
सतयुग से कलयुग तक
सभी बड़ी लड़ाईयाँ
अपने के ही वार से हुई ..
सीता माँ भी धोखा खा गई
फरेबी रावण के माया जाल से ...
Saturday, 30 September 2017
फरेब
Friday, 29 September 2017
सत्यमेवजयते
विजयादशमी है
उत्सव दानवों के
दमन का ..
सत्य की विजय
असत्य की हार
है सुनिश्चित ..
मद और बल में
चूर दानव न करता
यकीं पराजय का ..
धरती पे तांडव
नृत्य करता वो
अपराधों का ..
जनमानस जब
त्राही माम मचाते
तब लेती जन्म
माँ जगदम्बे करने
संहार दुष्टों का ..
देर से ही होता
सत्यमेव जयते ..
माँ जगदम्बे ले लो
आप जन्म दुबारा ..
पापियों ने मचा
रखा है धरती पर
घोर अनैतिकता का ..
भाई भाई एक दूजे के
हो रहे हैं खून के प्यासे
बढ़ गया है ईर्ष्या द्वेष
आपसी षड्यंत्रों का ..
व्यभिचारी और अधर्मी
दूषित कर रहे समाज को
करो नाश इन असूरों का
माँ बहा दो धारा प्रेम का ..
Thursday, 28 September 2017
खट्टे मीठे पल
कुछ खट्टे मीठे यादों का नाम जीवन
कोई सुंदर सी बातें कर याद मगन मन
वक्त के पन्ने जाए फिर से एकबार पलट
जी करता फिर से वो पल आए लौट ..
तो वक्त के उन पहलू में जी लू कुछ पल
काश मिल जाए वो अनोखा पल ..
कोई बेसुरी बतिया मन मुरझा देती
कर याद उन दिनों की सिहर सी जाती
मुश्किल है निकलना दुख के भंवर से
कोई भी न निकालते इस दलदल से ...
तकलीफों में होती है पहचान लोगों की
देखा है गिरगिट सा रंग बदलना लोगों का..
भूले बिसरे पल के कई ऐसे सहचर ..
जो बने थे दुख के दरिया के किनारे ..
वो बनके पतवार नैया डूबने न दिया
हमारे वजूद को बिखरने से बचाया
ऐसे सखा की स्मृति कभी भूला न पाते ..
वरना लोग तो पीछे से टांग खिंचा करते
Wednesday, 27 September 2017
बचपन वाला दशहरा
हे माँ दुर्गे कितने भी
बड़े पंडाल में करूँ
आपकी अर्चना ..
कितने ही भक्ति भाव से
करती हूँ आप की पूजा.
पर बचपन वाली
वो उल्लास भरी
आस्था मन को कहाँ मिलता ?
दादा जी के लिए
मिट्टी का शिवलिंग बनाना ..
बहनों से होड़ में अधिक
बनाकर जीतना..
वो फूलवारी में फूल
चुनने जाना ..
रंग बिरंगे फूलों से
ड़ाली भरकर लाना ..
देती थी खुशी मन को कितनी !!
काश वही दिन फिर से
आ जाए !!
नए नए कपड़े पहन
दादाजी और चाचाजी
सबसे अलग अलग
रूपये ले दोस्तों संग
मेला घुमना ..
आह कितना अच्छा लगता ..
आज कल के बड़े बड़े
कल्चरल प्रोग्राम
देखने से भी अधिक
गाँव का राम लीला
अच्छा लगता ..
माँ भगवती की मूर्ति दर्शन
भोग ग्रहण कर भी
उतना आनंद ना मिलता
बचपन वाला दशहरा
कभी नहीं आता ..
Tuesday, 26 September 2017
परवाज
मैं और मेरे सपने
जिसे परवाज देने में
खोयी रहती ..
रात दिन अथक प्रयास
करती रहती ..
जिन्दगी के पन्नों को
रंगों से भरने में
लगी रहती ..
सुहाने दिन यूँ न आते
जाने कितने दिन रात
तारों को देख
काटना पड़ता ..
गर सच्ची लगन
हो तो सपने को
हकीकत बन जाने से
कोई रोक नहीं सकता
सुहाने सफर
फूलों सी डगर
हर किसी की चाहत ..
जज्बे हो दिल में
सपनों को परवाज
देने का तो सपने
भी सच हो जाता
Monday, 25 September 2017
🌹हो हर दिवस बिटिया की🌹
बेटियाँ हर घर की रौनक होती
बेटियों की हँसी से घर महकता
बन जाता घर आंगन फूलवारी
जब बिटिया फूलों सी खिलती ..
झरणों सी मीठी धुन जिया को भाता
घर में उसकी जब किलकारी गूँजती
माँ पिता की जान होती बिटिया
बिन बेटियों के घर सूना ही रहता..
दो दो घरों में रिश्तों को वो बुनती
हर घर की रिश्तों की नींव होती
खूबसूरती से निभाती हर रिश्तों को
हौसले से जग में उँचे मकां बनाती ..
गगन में स्वच्छंद विचरणे के लिए
बेटियों को परवाज दें हर माँ पिता
तो तारे भी तोड़ लाएगी वो जमीं पर
सफलताओं के झंडे लहराएगी हर ओर ..
Sunday, 24 September 2017
पुलकित
मेरा मन हमेशा
तुम्हें ही पुकारता ..
तुम्हारे होने का सबब
हर चीजों में ढूंढता ..
तुम मेरे साथ हो न हो
तभी भी ऐसा लगता
तुम यहीं हो आस पास
तुम्हारे होने का अक्स
हर चीजों में मिलता ...
भीनी भीनी
महकी सी खुशबू
तुम्हारे मौजूदगी
का एहसास हर वक्त
मेरे रोम रोम को
करता पुलकित ..
शायद तुम समझ
भी नहीं पाते ..
तुम्हारे मौजूदगी में
मेरे मन मयूर कैसे
झूमने लगता ..
ये सोच तन्हाई में भी
मुझे एहसास होता
तुम यही हो मेरे पास !!!