Tuesday, 31 July 2018

भूल सुधार / लघुकथा

सुबह सुबह रवि को बहुत  सारे लोगों के जोर जोर से बोलने की आवाज सुनाई दी ... ।
वो भी आवाज की दिशा में चल पड़ा । उसने घर के पिछुआड़े में पोखर के बराबर पाट पर देखा बहुत से लोगों को गहन विचार विमर्श करते हुए । नजदीक पहुँच कर उसने किसी से पूछा आखिर माजरा क्या है ....?
उसने कहा नीचे देखो ...!
नीचे एक अर्धविकसित नन्हीं के शव  देख वो एकाएक चौंक गया....!!
सबने बताया ! हीरा चाची सुबह पोखर नहाने आई उसी ने
नन्हीं के शव को किनारे में देख गाँव वाले को बताया ...
सभी लोग आपस में सोचने लगे आखिर कैसे ढूँढा जाए इस जघन्य पापी को ....?
फिर विचार हुआ ! नर्स को सबके घर जाँच करने भेजा जाए..... ।
जल्दी ही सच्चाई सबके सामने आ गयी... "वो एक कुँवारी किशोरी निकली ...।"
नन्हीं के पिता कौन है सबने जानने के लिए उसपर दबाव बनाया ...।
लड़की ने जिस लड़के पर अंगुली उठाई वो गाँव के संभ्रांत परिवार का सजातिय बेटा ही निकला ... सब कोई आश्चर्य चकित हो गए... !
लड़की ने बताया, शादी के झांसे देकर उसने रिश्ते बनाया .....बाद में वो मूकर गया ....।
लड़की और उसकी माँ पापा फफक कर रोने लगे....और
कहने लगे भूल सुधार का यही उपाय सूझा....हम गरीब बड़े लोगों का क्या कर लेंगे ....?
पंचों ने लड़की और उसके माता पिता को पहले बहुत डाँटा...उसने कहा तुम लोग कब तक इस कूपमंडुता से निकलोगे..... !
" चोरी छिपे संबंध बनाने वाले धूर्त इंसान रिश्ते को कभी
भी अपना नाम नहीं दे सकता ...?"
शुरू में लड़का स्वीकार ही नहीं कर रहा था अपनी  संलग्नता..... !
"जब पंचायत वाले ने डी एन ए टेस्ट और मामले को कोर्ट में खिंचने की धमकी दी तो .....वो मान लिया अपना करतूत....।"
इस तरह का जघन्य अपराध फिर से कोई करने की हिम्मत न करे, इसलिए पंचों ने विचार विमर्श कर दोनों की शादी कराना ही उचित समझा ... ।
फिर पंचायत वाले ने लडका व उसके घर वाले पर ..... "किशोरी से शादी करने का फैसला सुनाया । गाँव वाले के उग्र रूख को देखकर और परिवार की बची खुची इज्जत  को ढकने के लिए शादी करने में ही उसने अपनी भलाई समझी..।"
सबके उपस्थिति में, "उसने लड़की के गले में माला डालकर मांग भर दिया ...पंचों के इस शर्त पर कि वो लड़की को कभी प्रताड़ित नहीं करेगा ।"

भूल सुधार / लघुकथा

सुबह सुबह रवि को बहुत  सारे लोगों के जोर जोर से बोलने की आवाज सुनाई दी ... ।
वो भी आवाज की दिशा में चल पड़ा । उसने घर के पिछुआड़े में पोखर के बराबर पाट पर देखा बहुत से लोगों को गहन विचार विमर्श करते हुए । नजदीक पहुँच कर उसने किसी से पूछा आखिर माजरा क्या है ....?
उसने कहा नीचे देखो ...!
नीचे एक अर्धविकसित नन्हीं के शव  देख वो एकाएक चौंक गया....!!
सबने बताया ! हीरा चाची सुबह पोखर नहाने आई उसी ने
नन्हीं के शव को किनारे में देख गाँव वाले को बताया ...
सभी लोग आपस में सोचने लगे आखिर कैसे ढूँढा जाए इस जघन्य पापी को ....?
फिर विचार हुआ ! नर्स को सबके घर जाँच करने भेजा जाए..... ।
जल्दी ही सच्चाई सबके सामने आ गयी... "वो एक कुँवारी किशोरी निकली ...।"
नन्हीं के पिता कौन है सबने जानने के लिए उसपर दबाव बनाया ...।
लड़की ने जिस लड़के पर अंगुली उठाई वो गाँव के संभ्रांत परिवार का सजातिय बेटा ही निकला ... सब कोई आश्चर्य चकित हो गए... !
लड़की ने बताया, शादी के झांसे देकर उसने रिश्ते बनाया .....बाद में वो मूकर गया ....।
लड़की और उसकी माँ पापा फफक कर रोने लगे....और
कहने लगे भूल सुधार का यही उपाय सूझा....हम गरीब बड़े लोगों का क्या कर लेंगे ....?
पंचों ने लड़की और उसके माता पिता को पहले बहुत डाँटा...उसने कहा तुम लोग कब तक इस कूपमंडुता से निकलोगे..... !
" चोरी छिपे संबंध बनाने वाले धूर्त इंसान रिश्ते को कभी
भी अपना नाम नहीं दे सकता ...?"
शुरू में लड़का स्वीकार ही नहीं कर रहा था अपनी  संलग्नता..... !
"जब पंचायत वाले ने डी एन ए टेस्ट और मामले को कोर्ट में खिंचने की धमकी दी तो .....वो मान लिया अपना करतूत....।"
इस तरह का जघन्य अपराध फिर से कोई करने की हिम्मत न करे, इसलिए पंचों ने विचार विमर्श कर दोनों की शादी कराना ही उचित समझा ... ।
फिर पंचायत वाले ने लडका व उसके घर वाले पर ..... "किशोरी से शादी करने का फैसला सुनाया । गाँव वाले के उग्र रूख को देखकर और परिवार की बची खुची इज्जत  को ढकने के लिए शादी करने में ही उसने अपनी भलाई समझी..।"
सबके उपस्थिति में, "उसने लड़की के गले में माला डालकर मांग भर दिया ...पंचों के इस शर्त पर कि वो लड़की को कभी प्रताड़ित नहीं करेगा ।"

Friday, 27 July 2018

सावन सुहावन

घनन घनन घन मेघा बरसे
सावन आये जिया हर्षाये

बिजली चमके दामिनी दमके
मुझको डराए कारी कारी रैना
रह रह के मेरे ये दिल धड़के
आई है कैसी रूत ये सुहानी 

घनन घनन घन मेघा बरसे
मन आंगन में खुशियाँ बरसे

बागों में कोयल कू कू कुहके
सावन में देखो पड़ गए झूले
कजरी गावे सखी सब मिली के 
प्रियतम संग सब पींगे झूले

घनन घनन घन मेघा बरसे
सावन आए जिया जलाये

हाथों में सब मेंहदी सजावे
करके श्रृंगार पिया को रिझावे
विरह की मारी किछु नहीं भावे
तुम बिन सजन मुझे चैन न आवे

घनन घनन घन मेघा बरसे
मोरे पिया परदेश सिधारे

जा रे बदरा तू जिया न जला
विरह की मारी वन वन भटकूँ
ओ री पवन तू पी को बूला ला
पड़ जाए चैन मोरे हिया को

घनन घनन घन मेघा बरसे ..
सावन आए जिया हर्षाये

Thursday, 26 July 2018

वादा

नेट पर पी सी एस का रिजल्ट देखते ही शंकर के आँखों से खुशी के अश्रु बहने लगा । उसके बेजान जीवन को मानो संजिवनी बूटी मिल गई ...।

अपने माँ पापा व गुरूजनों के आशीर्वाद लेने के बाद...वो
जल्दी जल्दी वाइक निकालकर आनन- फानन में ही पहुँच गया अपने प्रियतमा के घर सफलता का परचम लहराने....।

जहाँ,प्रिया के मम्मी पापा के साथ सभी लोगों ने ढेरों बधाईयाँ दी,सब कोई गर्मजोशी से उसका स्वागत करने लगे। इसी पल के इन्तजार में उसने जाने कितने ही रातें  जग के बिता दिया था ....।

रिजल्ट निकलने से पहले वो डरा डरा सा रहता, पेपर से संतुष्ट होने के बावजूद स्पर्धा के भेंड़ चाल से भयभीत था  ..।
रात दिन यही ख्याल सता रहा था कि, अगर उसका सेलेक्सन पी सी एस में नहीं हुआ तो प्रिया से जीवन भर
 के लिए बिछुड़ जाएगा । अब कोई मौके भी नहीं देंगे प्रिया के घरवाले ..।

दोनों का मिलना एक इत्तेफाक ही था..."जाने कैसे एक
दिन शंकर की नजर प्रिया पे पड़ गई....!
जबकि दोनों का क्लास अलग अलग था । शंकर बी ए आनर्स और बी एस सी में प्रिया थी...।"

शंकर का अधिकतर समय प्रिया का पीछा करने में बर्बाद होने लगा । वो जहाँ जाती पीछे पड़ जाता । पढ़ने लिखने में उसका मन तो लगता नहीं था, बस प्रिया के प्यार में दीवाना बना फिरता । इस चक्कर में मेधावी प्रिया की पढ़ाई बाधित हो रही थी ... ।

"नाहक ही प्रिया बदनाम हो गई थी...।"

एक दिन प्रिया ने हिम्मत करके शंकर से कहा, अगर आपको मुझे पाना है तो कुछ बनके दिखा दीजिए.. मैं आपसे शादी करने के लिए अपने घर वालों को मना लूँगी ....।

परन्तु जब तक आप कुछ न बन जाएँ, हमसे न मिले इसका वादा करना होगा ...।

"शंकर ने बोला ठीक है पर ये बात तुम्हारे मम्मी पापा के मुँह से सुनना चाहता हूँ... ।"

प्रिया ले आई शंकर को अपने घर, परिवार के लोगों ने भी यही कहा ...।
"आज शंकर ने लक्ष्य भेद कर प्रेम को नई उँचाई बख्स दी...!!"
कहते हैं गर प्यार सच्चा हो तो उसे मिलाने में सारी कायनाते एक हो ही जाती ...।

बुलंद हौसला

उफान देख नदियों का
मांझी गर दिल थाम ले
छोड़ दे हाथ पाँव चलाना
तो मझधार में ही डूबके
रहेगी किस्ती उनकी ..
हिम्मत वाले तूफानो को
गुजर जाते छू के ..

नाव लहरों के हवाले
छोड़ देते हैं बुजदिल
बुलंद हो अगर हौसला
तो समुन्दर के बीच से
वो जाते हैं निकल ..

जग के जाने कितने झमेले
अनेकों होते यहाँ भेड़ चाल
जीवन के इस माया जाल
से निकलना बहुत मुश्किल
आत्मबल से मिलता है हल

जो मन से हार मान ले
डर जाए देख लहरों को
वो बैठे रहते साहिल पे
घबरा के...
साहस को जो साथी बना ले
वो ही पार करते भव सागर को..


Tuesday, 24 July 2018

मुक्ति / उषा झा

इस बार गाँव गई तो पता चला, दयालु को चौथी बेटी हो गई ।
हर किसी के जुबान पे हाय हाय सुनने को मिल रहा था । सब यही कहता, वो अनपढ़ एक खेती के भरोसे कैसे बेटियों को पढ़ायेगा.. ? दहेज के लिए धन कहाँ से लाएगा.. ?

"भगवान ने उसके साथ बड़ा अन्याय किया... !...एक बेटा देते तो उनका क्या जाता ..?"

"मुझे ये सब सुनकर बहुत गुस्सा आया.. ! मैंने पति पत्नी को समझाने का मन बनाया ...। "

"अगले ही दिन पहँच गई उसके घर ! दयालु ने पैर छुआ, फिर दौड़कर अपने पत्नी रमा को बुलाया, उसने भी पैर छुआ ..मैंने भी घझउसे गले लगाकर , स्वास्थ्य वगैरह की जानकारी ली ।"

मैं दयालु से बात कर ही रही थी कि ...कहीं से लाल काकी आ गयी । लाल काकी के पैर मैंने छूआ , फिर वो अपनी बीमारियों का चर्चा करने लगी । इतने में रमा चाय बनाके ले आई ...।
अब जो कहने उसके घर गई थी वो कहना शुरू किया ...।

"मैंने रमा और दयालु से कहा ! बहुत नासमझी तुमलोगों ने दिखा दी ..!  बेटा के चक्कर में कितने बेटी पैदा करोगे ..?"

दयालु से कहा डॉ के पास जाकर बीवी का लेप्रोस्काॅपिक आपरेशन करा लो, मामूली खर्चों में निबट जाओगे ! रमा को अधिक पीड़ा भी नहीं होगी,एक दो दिन में स्वस्थ हो जाएगी ।

"लाल काकी सब सुन रही थी,वो बीच में ही बोल पड़ी..
बाकी सब तो ठीक पर बिन पुत्र के मुक्ति कैसे मिलेगी ..?"

"जल देने वाला न हो तो भूत बनके पेड़ पर लटकना पड़ेगा ।"

अचानक मेरी आवाज तल्ख हो गई ....मोक्ष के अंधविश्वास में  पूरे परिवार तिल तल कर मरे... ! सिर्फ जलदाता के लिए..!
  ये कैसा पंथ..... ? कैसा धर्म....?
"जहाँ बेटी उचित लालन पालन व शिक्षा को तरसे ....!
 मरने के बाद की बात किसे पता ..?"

 

Monday, 23 July 2018

सच्ची श्रद्धांजलि

कल जब पापा आए थे कितने स्वस्थ थे ...सुबह के नाश्ते व दिन के खाने तक  कितनी गप्पें हुई जरा भी आभास नहीं हुआ
रिया को कि ,उनको कोई तकलीफ है ।
शाम को फिर से आने की बात कहकर गए भाई के घर । आधी रात में खबर आई पापा बहुत सिरियस हैं ....।
सोते बेटे को छोड़ भागी वो हास्पिटल पर न जाने विधि को   क्या मंजुर था ...? जीवन भर का गम देकर सुबह सुबह  जुदा हो गए हमेशा के लिए ...!

शोक संतप्त परिवार ऐसे दुख में डूबा कि होश ही नहीं रहा
अगले ही दिन बच्चों के फाइनल परीक्षा है ....।
खैर बच्चे बेचारे खुद अपना ध्यान रखकर पढ़ाई कर रहे थे ।
पूरे घर में खचाखच भीड़ लगी थी...

 पड़ोसियों और पंडित जी के बताए अनुसार चंदन के धूप शुद्ध घी का अंखड दीप जलाकर , तुलसी, मखान पान, गंगाजल ,
सोना व शहद पापा के मुख में डालकर रिया फफक पड़ी.... जार बेजार रोते रोते देशी घी का मालिश करते हुए वो बेसुध
ही हो गई ...।

भाई - भाभी और रिश्तेदारों ने माँ को संभाला हुआ था ..।
खैर शाम होते होते गाँव से भी भाभी भाई आ गए ....।
पार्थिव शरीर को हरिद्वार ले जाने की तैयारी होने लगी तो पंडित  ने नाती रिशू को भी साथ ले चलने के लिए रिया से कहा....।
 उनकी मान्यता थी ... नाती का लकड़ी देना हर नाना नानी के सौभाग्य की बात होती है ।

 खैर माँ की इच्छा देखकर, "रिया ने रिशु से कहा चलो नाना जी की आत्मा की शांति के लिए तुम्हारा लकड़ी चढाना जरूरी है....।"
 
वो आया नाना जी के उपर फूल डालकर पैर छूकर प्रणाम किया । फिर सबसे  कहा ! कल मेरा फिजिक्स का पेपर है ,
अगर मैं गया तो रात भर का समय बरबाद हो जाएगा... ।

"कल के पेपर में फिर मैं शत प्रतिशत नम्बर लाने से चुक  जाऊँगा ।"

"अगर मुझे परीक्षा में अच्छे अंक आएँगे तो नाना जी को बहुत खुशी होगी ... क्योंकि नाना जी की दिली इच्छा भी यही रहती थी ....।"
" नाना जी के लिए  सच्ची श्रद्धांजलि भी यही है मेरी .....।"
नौवें क्लास के बच्चे के तर्कसम्मत बातें  सुन सब अचंभित हो गए...!!

 
 .