Tuesday, 26 February 2019

खुशनुमां पल

कुछ यादें दिल में ही दफनाने के लिए हैं
शायद वो रिश्ते बने आजमाने के लिए हैं

जमाने भर का गम दफना रखा है सिने में
आके देख ले कई जख्म दिखाने के लिए हैं

जाने किस बात की सजा दी क्यों भूल गया
डूबी विरह में तन्हाईयाँ तो सताने के लिए हैं

ये जिन्दगी अब तो उनके रहमो करम पे
टूटे न दिल, मुहब्बत तो निभाने के लिए हैं

इन्तजार में कट जाती है मेरी सुबहो शाम
अब तो ये दर्द सारी उम्र तड़पाने के लिए हैं

तेरा इश्क ने छिन लिया है मेरे सारे ही सुकून
एक झलक काफी कहर बरपाने के लिए हैं

प्रीत की बूँदे अब बरसा देना भींगे पलको पर
जीवन के खुशनुमां पल होते इतराने के लिए हैं

Saturday, 23 February 2019

सच का नंगापन

विधा- -गीत  (ताटंक छंद)

 सत्य सुनने बोलने का मन , कहाँ रही अब लोगों की
 जान बूझ कर सब कोई क्यों,  पट्टी बाँधी आँखों की

मौन तमाशा देख रहे सब,,नंगापन बहशियों का वो
गांधारी बने समाज , बच,, न पाए दरिन्दों से वो
सभी आड़ में छल प्रपंच के ,,लूटते मनुजता को हैं
करे जान के सच अनसूनी ,, न्याय कहाँ बहरों से है
रोये हृद,सरेआम स्मिता ,,,लुटती है बच्चीयों की
जान बूझकर सब....

आँखों देखी साथ सत्य का ,,, कोई तो देने आते
दिल न पिघलता अन्याय देख , कट कर राह चले जाते
दूजे के दुख तकलीफों से , वास्ता नहीं  रखे कोई
मतलब परस्त जग में न पाक, दामन रखे सभी कोई
बेबसी की खिल्ली उड़ाना ,फितरत होती लोगों की
जान बूझकर सब ....

कराह रहा सत्य  घुट घुट कर,, रूप हकीकत के भोंडे
पर्दे के पीछे राज रहे,,,सत्य से मुँह सभी मोड़ें
तन्हा पड़ा सड़क पे सच को,,,जानके कुचल दी जाती
भाता बहुत दिल को चाशनी,,में  झूठ परोसी जाती
नमक मिर्च डाल स्वादिष्ट सच ,, आदत है चटखारे की
जान बूझकर सब...

Wednesday, 20 February 2019

खुद की पहचान

राह न खुले किसी की जब तक  दिल में संकल्प नहीं
बुलन्द हौसला न हो तो उनको मिलती  मंजिल नहीं

अपने गिरेबां में सबसे पहले ,सबको झांक लेना चाहिए 
शीशे के घर में रहने वाले , किसी पे फेंकते पत्थर नहीं

दूसरे के जिन्दगी में झांकने वाले, करे खुद की फिकर
सोच की कभी उनके घर पर, पड़े किसी की नजर नहीं

दूसरे की खिल्ली उड़ाने की, लोगों की आदत है बूरी
जान ले तुम्हारा भी मखौल बनने में लगे विलम्ब नहीं

दूसरे के राहों  में गड्ढा खोदना बड़ा ही अमानुषिकता है
वक्त बदला चुन चुन कर लेता, बने खुद के दुश्मन नहीं

कर्तव्य व त्याग का पालन  कोई कोई ही किया करते
उपदेश नेकी का वही देते हैं जो खुद करते अमल नहीं

कभी कभी अपनों से हारना भी सुकून देता लोगों को
प्यार और विश्वास के बिन दिल में खिले कमल नहीं

धैर्य बेहद जरूरी जिन्दगी बार बार परीक्षा लेती है
हर किसी को आरामों सुकूं जिन्दगी मुकम्मल नहीं

नकारात्मकता हावी राग रागिनी में डूबे हैं रचनाकार
वीर रस की कविता लिखा करते हैं अब कलम नहीं

Saturday, 16 February 2019

चिराग

चश्मों चिराग देश का बूझ गया
आज गम में डूब गया हिन्दुस्तां

द्रोपदी ने आज है कसमें खाई
नम दृग से लट खोलके बैठ गई
दुश्मन के लहू से केश धोएगी
प्रण पूरा करके ही जूडा बांधेगी
दुष्टों तेरे शीश ही धीर बंधाएगी
वीरों की शहादत हो न अब जाया
चश्मों चिराग देश ...

मासूमों की जिन्दगी अब उजड़ गई
दूध मुँहें बच्चे भी यतीम बन गए
माँ की आँचल फिर सूनी हो गई
चवालिस लाल क्यों शहीद हो गए
बिलख बिलख कर रो रही बेटियाँ
धर्म की आड़ में वो दहशत फैलाया
चश्मों चिराग देश ...
 
सुहाग सेज अभी ही सजी थी
मेंहदी हाथ से निकली कहाँ थी
प्रियतम के प्यार के गुल खिले
नैनों ने ख्वाब अभी तो सजाया
वादा करके गया जल्दी आऊँगा
निर्मम तुमने सुहाग उजाड़ दिया
चश्मों चिराग देश का ...

बूढ़े बाप की लाठी छीन लिया
क्यों न कर पाए पापा विदाई
सोच बेटियों का दिल टूट गया
आतंकवादी शर्म क्यों न आई
दम है सामने से ताकत दिखा
कायर तूने पीठ पर वार किया
चश्मों चिराग देश ...

अबोध  बच्चे को दिशाहीन बनाया
धर्म व पैगम्बर  का खौफ दिखा कर
बारूद और बंदुक हाथ में थमा दिया
जन्नत के ख्वाब दिखाने के बहाने
अधर्मी खुदकशी की राह भेज दिया
विश्वपटल पे नाम तेरा अमिट करना है
आतंकवाद को जड़ से अब काटना है
औकात दिखाने का समय आ गया 
चश्मों चिराग देश का ...

निहत्थे सैनिकों के चिथडें उड़ गए
हर भारतीय का दिल सिसक रहा
इस जख्म से नीर नैन के सूख गए   
शांति संदेश तुम बुजदिली समझ रहा
अब तैयार हो जाओ कफन पहनने को
सन पैसठ,एकहत्तर, कारगिल तू भूल गया
चश्मों चिराग देश का ..

देश पे कुर्बान शहीदों पर हमको फक्र है
बूँद बूँद लहू एक सूत्र में बाँध चले गए हैं
वीर बांकुरे का बलिदान व्यर्थ न जाएगा
दहशत फैला के तू देश में कोहराम न मचा
पाक  तेरा मंसूबा पर पानी फिर जाएगा
पहन तिरंगा वीरों ने देश का मान बढ़ा दिया
चश्मों चिराग देश का ...

Friday, 15 February 2019

श्रद्धांजलि अमर शहीदों को

जन जन का खून खौल रहा बदले की आग में
आतंकवाद का सफाया करने से अब धीर बंधे
एक एक शीश लाया जाएगा खाते हैं हम कसमें

आज मातु भारती आँसु बहा रही
बेगुनाहों के खून से लथपथ हो रही
माताओं के गोद  उजाड़ दी  खूनी
जीवन पथ  पर हुई अकेली बहना
सुहागिन की मांग क्यों हो गई सूनी

देश उबल रहा सैनिकों की कुर्बानी के पश्चाताप में
जन जन का खून खौल रहा ...

दुश्मनों तेरा अंत अब आया नजदीक
कर ली तुमने अपनी बहुत ही मनमानी
बूँद बूँद लहू की कीमत पड़ेगी चुकानी
शहीदों की शहादत अब व्यर्थ न जाएगी
दुश्मन जान लो हमारा खून नहीं है पानी

हर भारतीय का दिल जल रहा आत्मसम्मान में
जन जन का खून खौल रहा ...

आत्मग्लानी में देश वासी जी नहीं पाएगा
आतंकवादियों को अब न बख्सा जाएगा
 देश को तोड़ने का ख्वाब देखना बंद करो
 दुष्टों तेरे नापाक इरादा कभी न पूरा होगा
दुश्मन को मुँह तोड़ जवाब दिया जाएगा

नेता अपनी रोटी सेंकनी बंद कर वोट के स्वार्थ में
जन जन का खून खौल रहा बदले की आग में

प्रेम दिवस

विधा- क्षणिका सृजन

प्रेम दिवस आया     1.
इजहार सरेआम
हाथों में हाथ लेकर
पर अंदर से छलिया
क्षणिक आवेश
दो पल में काफूर

प्रेम का बखान        2.
करते न थकते
जैसे हो कितने मर्मज्ञ
बारी आती प्रतिदान की
तो स्वीकार्य नहीं

ढोल पीटने वाले     3.
प्यार कभी न करते
नेह नयन से उतरकर
प्रविष्टि करे हृद के भीतर
झुकने न दे कभी गर्दन

मौन हृदय का स्पंदन    4.
द्व दिल तक पहुँचता
जाने कैसे लोगों में
हलचल मच जाती
जैसे तार का जुड़ा
सब में कनेक्शन

वेलेनटाइन डे मनाना     5.
प्रेम का जश्न न बने
थाम हाथ जीवन पर्यन्त
छोटी छोटी खुशियाँ
देना उम्र भर, पढ ले
प्रेम का पहला पाठ
निभाना वादा अपना

Thursday, 14 February 2019

वसंत आगमन

विधा-- दोहा /चौपाई

कुसुमाकर के तीर नित , करे प्रीत बौछार ।

मन उमंग छाने लगा, लूटा हृदय करार ।।

धरती  लेती  है  अंगड़ाई
वसंत ऋतु मधु रस बरसाई

अति प्रीती वसुधा पर छाई

 रोम रोम महि के पुलकाई

फूली  सरसों   पीली   पीली
दिल में पलती आस सजीली

छाई  खेतों  में   हरियाली
बाली  गेहूँ की  झुक डाली

अमिया में मंजर भर आई
नेह गंध मन  को  बहकाई

रुत  हसीन  रंगीन   नजारे
विरही मन भी सजन पुकारे

भरमाया ऋतुराज मन , नयी नयी करतूत ।
खिले सभी दिल हर्ष से,,लदे वृक्ष शहतूत।।

खिले पुष्प चहुँ ओर  घनेरे
विरहन हृद सुधियों के  डेरे  ।।

तरुण वृन्द की बढ़त है जारी,
कुहुक लगे कोकिल की प्यारी

द्वय  दृग नम मन हुआ फकीरा
बजते   हैं  ढप   ढोल   मँजीरा

खिलते उपवन - उपवन टेसू
उड़ते    हैं   गोरी    के   गेसू

मैल दिलों के लगे उतरने
रंग प्रीति  का लागा चढ़ने

लाई होली  खुशियाँ  सारी
रंगी  पिया  ने  काया सारी

बगिया में गुल खिल गये ,भ्रमर दिल गया डोल ।
दिल होली में मिल गये ,नाते हैं अनमोल ।।