Saturday, 29 June 2019

खौफ में कली

विधा--मधु मालती छंद
14/14
212 से अंत

खौफ में है अब लाड़ली
रहनुमा तोड़ रहे कली

फिर वो कली मुरझा गई
पाँव तले कुचल दी गई
रो रही मातु कहाँ चली
क्यों डाल से टूटी कली
खौफ में .....

तांडव दरिन्दों का जवां
डर में जी रहे बागवां
आज फ़िजा में जहर घुली
हवस की आँधी जो चली
खौफ में...

अपनों ने किया रूसवा
निकल गए यकीं का हवा
दगा के फल वृक्ष में फली
रिश्ते में जब दाँव चली
खौफ में...

मुश्किल मनुज बनना यहाँ
दानव ही बच गया यहाँ
मासूम जब जाती छली
जमीर क्यों न उसकी हिली
खौफ में ....

महफूज हो जग में सुता
जले न अरमान की चिता
दरिन्दे  चढ़ा रहे बली
नौ महिने कोख क्यों पली
खौफ में...

कुसुमित नहीं गुल बाग में
बिखरी कली परिवार में 
बदले की आग दिल में लगी
आस के दिन क्यों कर ढ़ली

खौफ में जीती अब लाड़ली
रहनुमा तोड़ रहे हैं कली

Tuesday, 25 June 2019

कुप्रथा

गीत(16/14 अंत गुरु लावणी छंद)
मुखड़ा   

कुरीति की बलि बेदी क्यों कर ,चढ़ती हर युग में नारी
किस्मत की मारी को ठोकर , मारे जग बारी बारी

अंतरा

नियति ने बीच भंवर छोड़ा,,मौन दृग से न नीर बहा
पूत संग रह गई अकेली ,, भरी जवानी में तन्हा
कामना राख सम बिखर गई,,कटे जीवन वेदना में
पीर विरह का अब जीवन भर ,,कहाँ अब स्वप्न नैनों में
अभागिनी को कौन मान दे,, अंतस जले पीर भारी
कुरीति के बलिबेदी...

रंग हीन जीवन में आशा ,,की किरण अब कैसे जले
नेह का डोर थाम जी रही ,,दिल में सुत के ख्वाब पले
पीर से पाषाण हृदय बना,, अटल चली कर्तव्य पथ में
पुत्र संग खुश माँ पल रहा  ,, वो ममता के आँचल में
हुई सफल तप सुत के सुंदर ,,भविष्य पे माँ बलिहारी
कुरीति के बली बेदी....

पुलक रही अबला बेटा को , जी भर आज निहारेगी
घोड़ी चढ़ पुकार रहा पूत , कब तक माँ तिलक करेगी
सबकी नजर से बचाने लगा ,, देती जो टीका कालें
वही माँ अपशगुन बनी चली,,,कुप्रथा गहरी चालें
हतभागी वैधव्य बुत बनी , अभागिनी ननद पुकारी
 कुरीति के बली बेदी....

देर देख बेटा आशंकित , घर में माँ को खोज रहा
अपशगुनी कैसे तिलक करे, माँ को किसी ने कहा
कुलजन संवेदन हीन बने,, हृदय पूत का व्यथित हुआ
धूँध छँटा सबके मन का जब,,सुत सबपर नाराज हुआ
पहचान माँ से,शगुन भी वो,, माँ फिर आरती उतारी
कुरीति पर वार....

शुभ अशुभ बात मन गढ़ंत ये ,, सभी बंदिशे न चलेगी
फिजूल की मनमर्जियाँ अब न,,नारी को कभी छलेगी
माँ ने शीर्ष पर पहुँचाया ,,  सबसे पहला हक उनका
हम सब की है जिम्मेदारी,, बहिष्कार करें प्रथा का
इस जग में माँ से अधिक नहीं ,, होती कोई उपकारी

कुरीति के बलि बेदी क्यों कर,,चढ़ती हर युग में नारी
किस्मत की मारी को ठोकर, मारे जग बारी बारी

Friday, 21 June 2019

प्रकृति मानव और योग

जन चेतना सबकी हो प्राथमिकता
पहला काम स्वास्थय जागरूकता
अंतराष्ट्रीय योग दिवस देता संदेश
स्वस्थ तन में ही सुन्दर मन बसता

जीवन के लिए योग बेहद उपयोगी
बना देता शरीर को फिर ये निरोगी
रख लो खुद का सभी ध्यान अपना
खुशियाँ तब ही तो मनु मुट्ठी में होगी

प्रकृति संग कुछ पल नित्य बिता लो
हरी घास में नंगे पाँव रोज टहल लो
दमकेगा तन, दौड़ेगें लहू धमनियों में
अपने ही जीवन से सब नेह कर लो

प्रकृति मानव का जुड़ाव हो हमेशा
रहता शरीर रोग मुक्त तब हमेशा
स्फूर्ति तभी बनी रहेगी तन मन की
सजी रहे मुखड़ा पर हँसी हमेशा

सक्रियता से रूप यौवन बरसों न ढ़ले
थोड़ी सजगता से अवश्य मुसिबत टले
मनुज योग को दिन चर्या में करें शामिल
रूग्ण शरीर में न उर कभी तिल तिल जले

Thursday, 20 June 2019

मैं हूँ चिकित्सक बबूल

बिन नीर भी उगूँ, जमीं, चाहे जैसी होय
 सुनसान में अचल मैं , हर्ष न विस्मय होय

रेगिस्तान की गर्मी ,,जला दे भू समूल
देकर छाँव राहत दूँ ,जब हो मनु व्याकूल

जीवन  भरपूर मुझमें,,खड़ा हूँ नदी तीर
 अंग अंग कंटक पड़ा,, हर लूँ सबका पीर

मैं बबूल हूँ चिकत्सक , हूँ औषधि का खान
हरियाली विहिन मरु में,पशु पक्षियों का जान

भरे जख्म गहरे लगा,, लो पत्ती का चूर्ण
 लेप करे काले घने ,, बने केश परिपूर्ण
 
नित्य लेप प्रयोग करें ,, गंजापन ठीक होय
 डाल से दातुन करो ,, रोग मुक्त दंत होय

परहित में जी रहा हूँ,,सहकर कितना शूल
उपयोगी अंग अंग, व्यंग,, करके न करो भूल

फल के चूर्ण सेवन से, हड्डी भी जुड जाय
गोंद के घोल से आँत, जख्म ठीक हो जाय

 बबूल छाल उबाल लो ,, एग्जीमा हो ठीक
फूल पके सरसोंउ तेल ,, कान दर्द हो ठीक

खड़ा रहूँ मैं मेड़ पर ,,,कब मानूँ मैं हार
भूखे पशुओं का सदा,,, बनता हूँ आहार

बाज न आए लोग कहे ,,, बबूल वृक्ष है भूत
कुछ कहे श्री हरि बसते ,,,तभी गुण है अकूत

Tuesday, 18 June 2019

धूप छाँव जीवन के

विधा:- गीत (16/12 सार ललित छंद)

#मुखड़ा

जीवन के धूप छाँव में है, आस प्रभु बस आपका
विसंगतियों मे हिम्मत रहे, बेबस कृषक देश का

#अंतरा

नित्य बहाता स्वेद कृषक जब,,मेहनत रंग लाती
नम नयनों में तभी खुशी की, तरंगें झिलमिलाती
फसल लहलहाये खेतों में, खिलता पुष्प हृदय का
जीवन के धूप छाँव में है ,, आस प्रभु बस आपका

सुखद पल का एहसास लिए, निरखू विदा हो रहा
अपलक नभ को निहारे दुआ ,, उसे मानो दे रहा
आह सुता क्यूँ रो रही पीर ,,दिल चीर गया उसका
जीवन के धूप छाँव में है...

फसल कृषक के पशु नष्ट करे,,दृग से अश्रु बरसता
चले उपर वाले की लाठी ,,,मूक मनु सब देखता
किस्मत का मारा है निरखू,,,हृद में तुफान उसका
जीवन के धूप छाँव में है...

बेटी दहेज से दुखी, फसल,,लील किया जब पशु  ने
व्यथित हृद नभ निहारे,क्या खता,,आज हुई अंजाने
जीवन में शोक अशोक साथ , पैगाम था खुशी का
जीवन के धूप छाँव....

चिट्ठी मिली अफसर पूत बना, छलका नीर खुशी का
पुत्र  करे साकार स्वप्न आस ,,बंध गए निरखू के
झोली भरे ईश निर्धन की ,, कौन उन्हें समझ सका

जीवन के धूप छाँव में है,, आस प्रभु बस आपका
विसंगतियों में हिम्मत रहे ,,बेबस कृषक देश का

Monday, 17 June 2019

चिकित्सक है बबूल

उगूँ बिन नीर भी जमीं  ,,, चाहे जैसी होय
नदी तालाब तीर भी,,, या सूनापन होय

मैं बबूल हूँ चिकित्सक , हूँ औषधि का खान
हरियाली विहिन मरु में,पशु पक्षियों का जान

जख्म गहरे भरे लगा,, लो पत्ती का चूर्ण
करे लेप काले घने,, बने केश परिपूर्ण
 
नित्य लेप प्रयोग करें ,, गंजेपन ठीक होय
 डाल से दातुन करो ,, रोग मुक्त दंत होय

परहित में जी रहा हूँ,,सहकर कितना शूल
उपयोगी अंग अंग, व्यंग,, करके न करो भूल

फल के चूर्ण सेवन से, हड्डी भी जुड जाय
गोंद के घोल से आँत, जख्म ठीक हो जाय

 बबूल छाल उबाल लो ,, एग्जीमा हो ठीक
पके फूल तेल सरसों  ,, कान दर्द हो ठीक

खड़ा रहूँ मैं मेड़ पर ,,,कब मानूँ मैं हार
भूखे पशुओं का सदा,,, बनता हूँ आहार

बाज न आए लोग कहे ,,, बबूल वृक्ष है भूत
कुछ कहे श्री हरि बसते ,,,तभी गुण है अकूत

Sunday, 16 June 2019

हिय में रहते पितु

पिता हर परिस्थिति
से लड़ना सिखाते
बच्चों के जीवन से
दूर रखते निराशा को..

जीवन के खार को
सहो तुम मुस्कुराते
कहते गम में भी हँस ले
जीत में बदल हार को..

प्यार और ममता को
लुटाते वो जीवन भर
स्वाभिमान से जीना
सिखाते हम सबको ...

बटूवे में पैसे न भी हो
बने रहते हैं वो अमीर
परिस्थिति जैसी भी हो
एहसास होने न दे बच्चे को

जिन्हें मरणोंपरान्त भी
अमर ही मानते सभी
उनमें से आप हैं पितु
जी रहे हिय में अब भी

उन बिन रिक्त जीवन को
कौन भर पाएगा कभी
कैसे सहेंगें गम हम बच्चे
सूझे न दिल को अब भी

उषा झा  (स्वरचित)
उत्तराखंड (देहरादून)
       🌷Happy fathers day 🌷