प्रलय की बाढ़ आई
सब कुछ डूबा ले गई ,
नैनों में नीर भर गई ..
छीन ले गई सबके चैन
दर्द दे गयी जाने कितने ।।
प्रलय की बाढ़ आई...
सालों से सिंचत किए ,
एक एक पाई ..
तनिक न बचा जमा पूँजी ..
कुछ न छोड़ा..
घर द्वार व खेत खलिहान
सब कुछ बहा ले गई ।।
प्रलय की बाढ़ आई...
जाने कितने ही लोग हो गए बेघर ,
कुछ न कर सके,बैठे रह गए
हाथ पर हाथ धर ..
जाने कितनों की जानें गईं ..
क्या बच्चे? क्या बूढ़े और जवान?
ईश्वर की लीला अपरम्पार ।।
प्रलय की बाढ़ आई...
दीन हीन बन गए सबसे लाचार !!
सोच में पड़े हैं अब कैसे करें गुजारा ?
कृषक सिर पर हाथ रख रो रहे
यही सोच रहे ..
कैसे करूँ अब खेती?
बीज भी न बचा घर पर ।।
प्रलय की बाढ़ आई ..
मदद की किससे लगाऊँ गुहार ?
सब तंत्र और मंत्र हैं बेकार ..
करते हैं सब झूठ फरेब की खेती
तुम ही लो भगवान सबको उबार ।।
प्रलय की बाढ़ आई ..
Wednesday, 23 August 2017
प्रलय की बाढ़
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